Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में 22 अक्टूबर 2026 को लगातार तीसरे सत्र दबाव देखने को मिला। Nifty 50 शुरुआती कारोबार में 22,600-22,700 के आसपास फिसला, जबकि Sensex भी कमजोर रहा। ऊंचे कच्चे तेल के दाम, पश्चिम एशिया में तनाव, महंगाई की चिंता और ब्याज दरों को लेकर सतर्कता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम की है।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
सबसे बड़ा दबाव crude oil से आया है। Brent crude 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए महंगा तेल आयात बिल, रुपये और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है।
Nifty और Sensex पर क्या असर?
22 अक्टूबर की शुरुआत में Nifty 50 करीब 0.5 प्रतिशत नीचे खुला और Sensex भी 300 से अधिक अंक कमजोर हुआ। इससे साफ है कि बाजार में फिलहाल तेजी की तुलना में risk-off sentiment ज्यादा प्रभावी है।
RBI की नीति और महंगाई की चिंता
RBI ने अक्टूबर की बैठक में repo rate बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत किया था और policy stance को calibrated tightening किया। इससे बाजार आगे के inflation और interest-rate संकेतों को ध्यान से देख रहा है।
किन सेक्टरों पर ज्यादा दबाव?
Metals, Auto, Pharma, FMCG, Oil & Gas और Realty जैसे कई सेक्टर दबाव में रहे। Midcap और Smallcap में भी कमजोरी बड़ी कंपनियों की तुलना में ज्यादा दिखाई दी।
निवेशकों को क्या रणनीति रखनी चाहिए?
ऐसे बाजार में जल्दबाजी में leveraged trade लेने के बजाय position size नियंत्रित रखना जरूरी है। निवेशक मजबूत balance sheet, reasonable valuation और earnings visibility वाली कंपनियों पर नजर रख सकते हैं। किसी भी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के परिणाम, valuation और risk को समझना जरूरी है।
निष्कर्ष
Share Market में मौजूदा कमजोरी को केवल एक दिन की गिरावट मानना सही नहीं होगा। Crude, global cues, RBI policy, institutional flows और quarterly earnings आने वाले सत्रों में दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेत रहेंगे। यह लेख केवल जानकारी के लिए है, इसे निवेश सलाह न माना जाए।
