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Share Market में Correction क्या होता है? Crash और Correction में समझें अंतर

Gaurav Yadav
Last updated: October 22, 2026 4:21 pm
By : Gaurav Yadav
Published on : 1 hour पहले
Share Market में Correction क्या होता है? Crash और Correction में समझें अंतर
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Share Market Correction: बाजार में तेज गिरावट देखकर investors अक्सर इसे crash समझ लेते हैं। लेकिन correction और crash अलग परिस्थितियां हैं। Correction आम तौर पर किसी recent high से meaningful decline को कहा जाता है, जबकि crash में गिरावट बहुत तेज और व्यापक हो सकती है।

Correction क्या होता है?

Correction बाजार की सामान्य price adjustment प्रक्रिया हो सकती है। लगातार तेजी के बाद investors profit book करते हैं, valuations reset होते हैं और नए buyers को entry का मौका मिल सकता है। हर correction recession या long-term bear market का संकेत नहीं होता।

Crash किसे कहेंगे?

Crash में selling pressure बहुत तेज होता है और बाजार में liquidity तथा confidence दोनों पर असर पड़ सकता है। Global crisis, financial shock या unexpected geopolitical event जैसे कारण crash को trigger कर सकते हैं।

मौजूदा बाजार में क्या हो रहा है?

अक्टूबर 2026 में Nifty और Sensex में हाल के sessions में कमजोरी आई है, जबकि midcap और smallcap indices में गिरावट ज्यादा रही। Crude oil 110 डॉलर से ऊपर रहने और geopolitical uncertainty ने risk appetite को प्रभावित किया है।

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Correction में investor क्या करे?

पहले portfolio की quality देखें। जिन कंपनियों के fundamentals मजबूत हैं और debt manageable है, उनमें long-term investors का approach अलग हो सकता है। कमजोर fundamentals वाले stocks में केवल price गिरने के कारण averaging करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

SIP और correction

Long-term SIP investors के लिए short-term correction अलग तरह से देखा जाता है क्योंकि investment horizon लंबा होता है। फिर भी asset allocation, emergency fund और risk tolerance को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Trading और investing में फर्क

Trader के लिए correction short-term trend और volatility का विषय है, जबकि investor company fundamentals और long-term earnings देखता है। दोनों के लिए एक ही strategy लागू नहीं होती।

निष्कर्ष

Share Market Correction हमेशा डरने की वजह नहीं है, लेकिन इसे blindly buying opportunity मानना भी सही नहीं। Market trend, valuation और company fundamentals के आधार पर निर्णय लेना ज्यादा जरूरी है।

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