Emergency Fund: नौकरी जाने, अचानक मेडिकल खर्च आने या घर में किसी बड़ी आर्थिक जरूरत के समय सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब खाते में पर्याप्त बचत नहीं होती। ऐसी स्थिति में लोग अक्सर क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन या दोस्तों-रिश्तेदारों से पैसे लेने पर मजबूर हो जाते हैं। इसी वजह से Emergency Fund यानी आपातकालीन फंड को पर्सनल फाइनेंस का जरूरी हिस्सा माना जाता है।
आमतौर पर विशेषज्ञ 3 से 6 महीने के जरूरी मासिक खर्च के बराबर रकम Emergency Fund में रखने की सलाह देते हैं। RBI की वित्तीय शिक्षा सामग्री में भी कम से कम तीन महीने के जीवन-यापन खर्च का रिजर्व रखने की बात कही गई है। अगर नौकरी की सुरक्षा कम है, बिजनेस या फ्रीलांसिंग से कमाई होती है तो छह महीने या उससे ज्यादा का फंड रखना बेहतर हो सकता है।
₹20 हजार Salary है तो कितना Emergency Fund रखें?
मान लीजिए आपकी महीने की Salary ₹20,000 है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको सीधे ₹60,000 से ₹1.20 लाख जमा करने हैं। Emergency Fund की गणना Salary के आधार पर नहीं, बल्कि जरूरी मासिक खर्चों के आधार पर की जाती है।
उदाहरण के लिए अगर आपके हर महीने के जरूरी खर्च इस तरह हैं:
| खर्च | रकम |
|---|---|
| किराया | ₹6,000 |
| राशन और खाना | ₹4,000 |
| बिजली-पानी/मोबाइल | ₹1,500 |
| आने-जाने का खर्च | ₹1,500 |
| जरूरी EMI/अन्य भुगतान | ₹2,000 |
| कुल जरूरी खर्च | ₹15,000 |
इस स्थिति में आपका Emergency Fund होगा:
- 3 महीने का फंड: ₹45,000
- 6 महीने का फंड: ₹90,000
यानी ₹20 हजार Salary वाले व्यक्ति के लिए अगर जरूरी खर्च करीब ₹15 हजार हैं, तो ₹45 हजार को शुरुआती लक्ष्य और ₹90 हजार को मजबूत Emergency Fund का लक्ष्य माना जा सकता है।
Emergency Fund में कौन-कौन से खर्च शामिल करें?
Emergency Fund बनाते समय हर तरह के खर्च को जोड़ने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले उन खर्चों की सूची बनाएं जिन्हें आमदनी रुकने पर भी बंद नहीं किया जा सकता।
इसमें आम तौर पर शामिल हो सकते हैं:
- घर का किराया
- होम लोन या दूसरी जरूरी EMI
- राशन और जरूरी खाना
- बिजली, पानी और गैस का बिल
- जरूरी दवाइयां
- बीमा प्रीमियम
- बच्चों की जरूरी फीस
- आने-जाने का न्यूनतम खर्च
वहीं घूमने, ऑनलाइन शॉपिंग, मनोरंजन, बाहर खाना या दूसरी गैर-जरूरी चीजों को Emergency Fund की गणना में शामिल नहीं करना चाहिए।
₹20 हजार की Salary में हर महीने कितना बचाएं?
अगर आपकी Salary ₹20,000 है तो शुरुआत में बहुत बड़ी रकम बचाने की कोशिश करने के बजाय नियमित बचत पर ध्यान दें।
मान लीजिए आप हर महीने ₹2,000 Emergency Fund में डालते हैं।
- 6 महीने में = ₹12,000
- 1 साल में = ₹24,000
- 2 साल में = ₹48,000
- 3 साल में = ₹72,000
अगर कभी बोनस, अतिरिक्त कमाई या कोई अप्रत्याशित रकम मिले तो उसका कुछ हिस्सा भी Emergency Fund में डाला जा सकता है। RBI भी सलाह देता है कि अगर पूरा फंड तुरंत बनाना संभव न हो तो छोटी रकम से शुरुआत करके धीरे-धीरे इसे तैयार किया जाए।
नौकरी पक्की नहीं है तो 6 महीने का फंड रखें
हर व्यक्ति के लिए Emergency Fund का लक्ष्य एक जैसा नहीं होना चाहिए। अगर आपकी नौकरी स्थिर है, खर्च कम हैं और परिवार में कमाने वाले एक से ज्यादा लोग हैं तो 3 महीने का रिजर्व शुरुआती सुरक्षा दे सकता है।
लेकिन अगर आप परिवार में अकेले कमाने वाले हैं, EMI ज्यादा है, नौकरी बदलने की संभावना है या आपकी आमदनी नियमित नहीं है तो 6 महीने या उससे अधिक के जरूरी खर्च का Emergency Fund रखना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है।
Emergency Fund का पैसा कहां रखें?
Emergency Fund का मकसद ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर पैसा तुरंत उपलब्ध होना है। इसलिए इसे ऐसे विकल्प में रखना बेहतर है जहां पैसे तक आसानी से पहुंच हो और बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम न हो।
एक अलग Savings Account में Emergency Fund रखना आसान तरीका है। RBI की वित्तीय शिक्षा सामग्री भी Emergency Fund के लिए अलग और आसानी से उपलब्ध Savings Account रखने की सलाह देती है।
इस पैसे को शेयर बाजार या ऐसे निवेश में रखने से बचना चाहिए जहां जरूरत के समय पैसा निकालने में परेशानी हो सकती है।
Emergency Fund को बार-बार खर्च न करें
Emergency Fund का इस्तेमाल हर अचानक आने वाले खर्च के लिए नहीं होना चाहिए। छुट्टी की बुकिंग, नया मोबाइल खरीदना या सेल में कोई सामान लेना Emergency नहीं है।
इस फंड का इस्तेमाल वास्तविक आर्थिक संकट जैसे नौकरी जाने, गंभीर मेडिकल खर्च, जरूरी घर की मरम्मत या अचानक आय रुकने जैसी परिस्थितियों में किया जाना चाहिए।
अगर किसी आपात स्थिति में इस रकम का इस्तेमाल करना पड़ जाए तो बाद में सबसे पहले इसे दोबारा भरने की कोशिश करें।
पहले ₹10 हजार, फिर ₹45 हजार का लक्ष्य रखें
अगर अभी आपके पास बिल्कुल बचत नहीं है तो ₹45 हजार देखकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटें।
पहला लक्ष्य ₹10,000, उसके बाद एक महीने के जरूरी खर्च, फिर तीन महीने का खर्च और अंत में छह महीने का खर्च रखें।
इस तरह Emergency Fund धीरे-धीरे तैयार होगा और आपकी Salary पर भी बहुत ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा।
