जौहर ट्रस्ट केस: मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में आजम खान के करीबी बताए जाने वाले ठेकेदार सालिम से बुधवार को करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई। एजेंसी ने ट्रस्ट को मिले चंदे, उससे जुड़े लेन-देन और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कई सवाल किए।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सालिम से पूछताछ का मुख्य फोकस ट्रस्ट को मिले डोनेशन के स्रोत, विभिन्न लोगों और संस्थाओं के बीच हुए वित्तीय लेन-देन तथा जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े निर्माण कार्यों पर रहा। ED पूछताछ के दौरान सामने आए बयानों और दस्तावेजों का मिलान कर यह समझने की कोशिश कर रही है कि रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और उसका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया।
सालिम से लगातार पूछताछ, फिर भेजा गया समन
रिपोर्टों के मुताबिक, सालिम से इससे पहले भी पूछताछ की जा चुकी है। बुधवार की पूछताछ के बाद एजेंसी ने उन्हें आगे भी पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच में सामने आए तथ्यों को अन्य लोगों के बयानों और वित्तीय रिकॉर्ड से मिलाया जा रहा है। ED यह भी देख रही है कि ट्रस्ट से जुड़े लेन-देन में अलग-अलग व्यक्तियों और कंपनियों की क्या भूमिका रही।
सालिम से पूछताछ के दौरान अनवर हुसैन और ट्रस्ट को कराए गए कथित डोनेशन से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी ली गई। रिपोर्ट के अनुसार, सालिम ने कुछ वित्तीय मामलों की जानकारी चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गोयल के पास होने की बात कही है। इसके बाद एजेंसी ने दीपक गोयल को भी दस्तावेजों के साथ पेश होने के लिए समन किया है।
चंदे के स्रोत और इस्तेमाल की जांच
जौहर ट्रस्ट केस में ED का एक अहम फोकस ट्रस्ट को प्राप्त चंदे का स्रोत और उसके इस्तेमाल पर है। एजेंसी अलग-अलग खातों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ट्रस्ट को विभिन्न स्रोतों से कितनी रकम मिली, उसके पीछे कौन से वित्तीय लेन-देन थे और जौहर विश्वविद्यालय से संबंधित गतिविधियों में उसका किस तरह इस्तेमाल हुआ।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय में हुए निर्माण कार्यों और उनसे जुड़े भुगतान का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में बताया जा रहा है। ED उपलब्ध दस्तावेजों की तुलना पूछताछ में सामने आए बयानों से कर रही है, ताकि वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी को समझा जा सके।
आजम खान से भी हो चुकी है लंबी पूछताछ
इस मामले में ED पहले ही समाजवादी पार्टी नेता और पूर्व मंत्री आजम खान से रामपुर जेल में पूछताछ कर चुकी है। 13 अक्टूबर को एजेंसी की टीम ने उनसे करीब साढ़े सात से आठ घंटे तक सवाल-जवाब किए थे। इस दौरान जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और कंपनियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर सवाल पूछे गए थे।
इसके अलावा जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जहीरुद्दीन और रामपुर के सपा विधायक नसीर अहमद खान से भी पूछताछ की जा चुकी है। एजेंसी अलग-अलग लोगों से मिली जानकारी को आपस में मिलाकर जांच को आगे बढ़ा रही है।
ED की जांच में दस्तावेजों का मिलान अहम
जौहर ट्रस्ट मामले में जांच एजेंसी अब तक हुई पूछताछ से सामने आए बयानों और वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर रही है। अधिकारियों की ओर से अंतिम निष्कर्ष या आरोपों पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए जांच के दौरान सामने आ रहे आरोपों और दावों को अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों पर निर्भर करेगी।
मामले में सालिम से दोबारा पूछताछ और अन्य संबंधित लोगों को समन किए जाने से संकेत है कि ED वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को विस्तार से खंगाल रही है। आने वाले दिनों में दस्तावेजों की जांच और पूछताछ के आधार पर इस मामले में आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकती है।
जौहर ट्रस्ट केस में आगे क्या?
- सालिम से पूछताछ में सामने आए तथ्यों का वित्तीय रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा।
- अनवर हुसैन और अन्य संबंधित लोगों से भी आगे पूछताछ हो सकती है।
- चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य पक्षों से दस्तावेज लेकर लेन-देन की पुष्टि की जा सकती है।
- ट्रस्ट को मिले चंदे के स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच आगे भी जारी रहेगी।
- आगे की कार्रवाई जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और ED के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और जांच से जुड़ी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मामले में ED की जांच जारी है और अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच व न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
