रांची। झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं का धैर्य अब जवाब देता नजर आ रहा है। JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।
मोरहाबादी स्थित धरनास्थल पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कई दिनों से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं छात्रों के आरोप?
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका दावा है कि इससे योग्य उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है और भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ा है।
इसी वजह से छात्र किसी एक परीक्षा की नहीं, बल्कि पिछली कई भर्ती प्रक्रियाओं की व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं।
चार प्रमुख मांगों पर अड़े छात्र
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
- जांच पूरी कर 90 दिनों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- JPSC और JSSC भर्ती मामलों की CBI और ED से जांच कराई जाए।
- दोनों आयोगों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों का व्यापक तबादला किया जाए।
- यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती तो मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
रांची का जयपाल सिंह स्टेडियम बना आंदोलन का केंद्र
धरने में हर दिन छात्रों की संख्या बढ़ रही है। जयपाल सिंह स्टेडियम और आसपास का इलाका आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। छात्र संगठनों का कहना है कि यह सिर्फ भर्ती परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के भविष्य का सवाल है।
आंदोलन और तेज करने की तैयारी
आंदोलनकारी संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। विधानसभा घेराव सहित कई बड़े कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।
सरकार की ओर से क्या?
फिलहाल सरकार की ओर से आंदोलन को लेकर कोई नई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की जांच पहले से विभिन्न एजेंसियों के स्तर पर चल रही है। दूसरी ओर, छात्र संगठनों का कहना है कि उन्हें केवल निष्पक्ष और समयबद्ध जांच चाहिए ताकि भर्ती प्रक्रिया पर फिर से भरोसा कायम हो सके।
