पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देश में चले छात्र आंदोलन के बीच अभिनेता मुकेश खन्ना ने एक बार फिर अपनी बात रखी है। इस बार उन्होंने आंदोलन के मूल मुद्दे और उसके राजनीतिक रुख पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि पेपर लीक छात्रों के भविष्य से जुड़ी गंभीर समस्या है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को निशाना बनाने को लेकर उन्होंने सवाल खड़े किए हैं।
मुकेश खन्ना ने अपने बयान में कहा कि छात्रों की नाराजगी की असली वजह परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक है। अगर कोई छात्र महीनों तैयारी करने के बाद परीक्षा देता है और बाद में पेपर लीक होने की वजह से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ जाता है, तो उसका परेशान होना स्वाभाविक है। लेकिन उनके मुताबिक आंदोलन आगे बढ़ते-बढ़ते अपने मूल मुद्दे से अलग दिशा में चला गया।
पेपर लीक पर मुकेश खन्ना का सवाल क्या है?
मुकेश खन्ना का मुख्य सवाल यही है कि अगर पेपर लीक में प्रधानमंत्री या शिक्षा मंत्री की सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं है, तो प्रदर्शन का गुस्सा उनके खिलाफ क्यों गया।
उन्होंने पेपर लीक को कोई नई समस्या नहीं बताया। उनका कहना है कि उनके कॉलेज के दिनों में भी इस तरह की घटनाएं सामने आती थीं। यानी उनके मुताबिक समस्या काफी पुरानी है और आज भी इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
खन्ना का कहना है कि असली फोकस उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक करते हैं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं।
छात्रों की चिंता को गलत नहीं मानते मुकेश खन्ना
मुकेश खन्ना ने छात्र आंदोलन को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उनके बयान का एक अहम हिस्सा यह भी है कि वह पेपर लीक को छात्रों के लिए गंभीर समस्या मानते हैं।परीक्षा की तैयारी में छात्रों का लंबा समय, पैसा और मानसिक दबाव लगता है। ऐसे में अगर परीक्षा से पहले या बाद में पेपर लीक जैसी गड़बड़ी सामने आती है तो इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ता है जिन्होंने ईमानदारी से तैयारी की होती है।इसी वजह से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लंबे समय से उठती रही है। CJP आंदोलन में भी परीक्षा सुधार, पेपर लीक रोकने और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे थे।
प्रदर्शन पर भी उठाए सवाल
मुकेश खन्ना ने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के कुछ हिस्सों में स्थिति शांतिपूर्ण प्रदर्शन से आगे बढ़ गई और पुलिस के साथ टकराव हुआ।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बाहरी ताकतों ने छात्रों को प्रभावित किया और आंदोलन को अलग दिशा में ले जाने की कोशिश की। हालांकि, यह मुकेश खन्ना का दावा है, इसलिए इसे किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
दरअसल, 20 जुलाई को CJP की ओर से संसद मार्च के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने कार्रवाई को भीड़ के हिंसक होने और कथित पत्थरबाजी के बाद उठाया गया कदम बताया था, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे।
CJP आंदोलन का मुद्दा क्या था?
CJP यानी Cockroach Janta Party से जुड़े छात्र आंदोलन की शुरुआत परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे से हुई थी। आंदोलन के दौरान NEET समेत दूसरी परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक पर कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई गई।
बाद में आंदोलन ने राजनीतिक रूप भी लिया और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुख हो गई। जुलाई में लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद छात्रों ने सिर्फ मंत्री बदलने के बजाय परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग पर जोर दिया। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, शिक्षा को ज्यादा किफायती बनाने और सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने जैसी मांगें भी सामने आईं।
आंदोलन के बाद भी जारी है शिक्षा सुधार की बहस
CJP का आंदोलन खत्म होने के बाद भी परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस थमी नहीं है। संगठन ने अब सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘School Thik Karo’ अभियान पर भी जोर दिया है।
इस अभियान के तहत स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की कमी, फंडिंग और डिजिटल सुविधाओं जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इससे साफ है कि छात्र आंदोलन की बहस अब केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रही है।
पेपर लीक की समस्या का समाधान कैसे हो?
मुकेश खन्ना के बयान के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाएं।
छात्रों की मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। CJP ने परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए पांच सूत्रीय सुधार एजेंडा भी सामने रखा था।
सरकार की ओर से भी पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की बात सामने आई थी। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े FIR को लेकर भी बाद में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। 31 अगस्त को केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया।
मुकेश खन्ना की टिप्पणी से फिर गरम हो सकती है बहस
मुकेश खन्ना पहले भी CJP आंदोलन और प्रदर्शनकारियों को लेकर तीखी टिप्पणी कर चुके हैं। अगस्त की शुरुआत में उन्होंने एक वीडियो के जरिए आंदोलन को ‘sponsored’ बताए जाने का दावा किया था और प्रदर्शन में शामिल लोगों के व्यवहार पर सवाल उठाए थे।
अब उनके ताजा बयान में फोकस पेपर लीक की समस्या और आंदोलन के राजनीतिक रुख पर है। उनका कहना है कि छात्रों की परेशानी वास्तविक है, लेकिन आंदोलन को उन लोगों के खिलाफ केंद्रित होना चाहिए जो परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं।
हालांकि, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर बहस में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि केवल सीधे तौर पर किसी घटना में शामिल होना ही जिम्मेदारी का आधार है या फिर प्रशासनिक और नीतिगत जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। यही बहस आने वाले समय में परीक्षा सुधार की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
