Musafir Cafe Review: अगर आपको रिश्तों, अधूरे प्यार और जिंदगी में दूसरी शुरुआत जैसी कहानियां पसंद हैं, तो Netflix की नई वेब सीरीज ‘Musafir Cafe’ आपकी वॉचलिस्ट में जगह बना सकती है। विक्रांत मैसी, वेदिका पिंटो और महिमा मकवाना स्टारर यह 8 एपिसोड की सीरीज लेखक दिव्य प्रकाश दुबे के चर्चित उपन्यास पर आधारित है। सीरीज प्यार, बिछड़ने और खुद को दोबारा खोजने की भावनात्मक यात्रा दिखाती है।
कहानी क्या है?
कहानी चंदर मोहन शर्मा (विक्रांत मैसी) की है, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है लेकिन दिल से लेखक बनना चाहता है। उसकी मुलाकात तलाक की वकील सुधा (वेदिका पिंटो) से होती है। दोनों के बीच गहरा जुड़ाव बनता है, लेकिन जिंदगी उन्हें अलग रास्तों पर ले जाती है।

समय बीतने के बाद चंदर पहाड़ों में ‘मुसाफिर कैफे’ नाम से एक कैफे शुरू करता है, जहां उसकी मुलाकात प्रीति (महिमा मकवाना) से होती है। इसके बाद कहानी पुराने प्यार और नई जिंदगी के बीच उलझे रिश्तों की तरफ बढ़ती है।
विक्रांत मैसी फिर छोड़ते हैं छाप
विक्रांत मैसी एक बार फिर अपने सहज अभिनय से प्रभावित करते हैं। चंदर के किरदार में उनका भावनात्मक संघर्ष पर्दे पर स्वाभाविक लगता है। वहीं वेदिका पिंटो ने स्वतंत्र सोच वाली सुधा का किरदार अच्छी तरह निभाया है। महिमा मकवाना भी अपने रोल में संतुलित अभिनय करती हैं और कहानी को मजबूती देती हैं।
क्या है सीरीज की कमजोरी?
सीरीज की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी रफ्तार है। 8 एपिसोड की कहानी कई जगह जरूरत से ज्यादा खिंची हुई महसूस होती है। कुछ दृश्य खूबसूरत जरूर हैं, लेकिन उन्हें और संक्षिप्त किया जा सकता था। अगर आपको तेज गति वाली कहानी पसंद है, तो शुरुआती एपिसोड थोड़ा धीमे लग सकते हैं।
क्या आपको देखनी चाहिए?
अगर आप एक्शन या थ्रिलर की बजाय रिश्तों और भावनाओं पर आधारित शांत और सुकून देने वाली कहानियां पसंद करते हैं, तो Musafir Cafe आपको निराश नहीं करेगी। हालांकि, जो दर्शक तेज रफ्तार और लगातार ट्विस्ट वाली कहानी चाहते हैं, उन्हें यह सीरीज थोड़ी लंबी लग सकती है।
