अयोध्या: राम मंदिर CEO के तौर पर रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति कर दी गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को अयोध्या में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। जितेंद्र मिश्र राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) होंगे। उनके साथ ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। ट्रस्ट की बैठक श्री मणिराम दास छावनी में हुई। इसमें मंदिर के प्रशासनिक और संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। CEO की नियुक्ति को मंदिर व्यवस्था में पेशेवर प्रशासन और जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कौन हैं जितेंद्र मिश्र?
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक सेवा दे चुके हैं। वह फाइटर पायलट रहे हैं और वायुसेना में कई महत्वपूर्ण कमान और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। जनवरी 2025 में उन्हें वेस्टर्न एयर कमांड की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उन्होंने इस महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमांड का नेतृत्व किया था। ट्रस्ट को उम्मीद है कि वायुसेना में लंबे प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव का इस्तेमाल राम मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में किया जा सकेगा।
5,585 आवेदनों में से हुआ चयन
राम मंदिर CEO के पद के लिए ट्रस्ट ने व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई थी। इस पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी ने आवेदनों की जांच के बाद उम्मीदवारों को अलग-अलग चरणों में शॉर्टलिस्ट किया। अंतिम चरण में 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया और तीन नाम ट्रस्ट के सामने रखे गए। इसके बाद ट्रस्ट की बैठक में जितेंद्र मिश्र के नाम पर अंतिम फैसला लिया गया।
ट्रस्ट में तीन नए सदस्य शामिल
CEO की नियुक्ति के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव शामिल हैं।
| नाम | विवरण |
|---|---|
| मदन मोहन पांडेय | अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता |
| महेश भागचंदका | दिल्ली निवासी |
| निर्मला यादव | शिकोहाबाद से |
इन तीन नियुक्तियों से ट्रस्ट में खाली हुए पदों को भरा गया है। ये पद पूर्व पदाधिकारियों के इस्तीफे और एक सदस्य के निधन के बाद रिक्त हुए थे।
CEO के पास क्या होंगी जिम्मेदारियां?
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, मंदिर की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए पेशेवर प्रशासन के लिए CEO की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। नए नियमों के तहत CEO के अधिकार और जिम्मेदारियां तय की जाएंगी। CEO ट्रस्ट के महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे और उन्हें प्रशासनिक, वित्तीय तथा वैधानिक मामलों से जुड़े अधिकार दिए जाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य मंदिर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा और प्रशासनिक कामकाज को अधिक व्यवस्थित करना है।
विवाद के बाद प्रशासनिक बदलाव
राम मंदिर ट्रस्ट में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पिछले कुछ समय में मंदिर से जुड़े चंदे और वित्तीय प्रबंधन को लेकर विवाद सामने आए थे। इसी पृष्ठभूमि में ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से CEO की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को मजबूत करना और व्यवस्थाओं को अधिक पेशेवर तरीके से संचालित करना बताया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंदिर के चंदे और अयोध्या में जमीन से जुड़े पुराने विवादों का जिक्र करते हुए पारदर्शिता की जरूरत पर सवाल उठाए। ये उनके राजनीतिक आरोप और प्रतिक्रिया हैं, जिन्हें ट्रस्ट की ओर से लगाए गए आरोपों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
