जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में धमाकों से दहला इलाका; अमरुद्दीन के दो मंजिला मकान में लगी आग के बाद देर तक होते रहे विस्फोट, रिहायशी इलाके में पटाखा निर्माण को लेकर उठे गंभीर सवाल
Siwan News: 23 अक्टूबर। बिहार के सिवान जिले में पटाखा निर्माण और भंडारण से जुड़े एक हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में शुक्रवार शाम पटाखों में आग लगने के बाद एक के बाद एक कई जोरदार विस्फोट हुए।
हादसे में पांच लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव कार्य में जुटी टीमों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आलमपुर गांव में लंबे समय से पटाखा बनाने का काम होता रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब एक दर्जन घरों में पटाखों का निर्माण किया जाता है। शादी-विवाह और दूसरे मांगलिक आयोजनों के अलावा दीपावली, छठ और लगन के मौसम में यहां तैयार होने वाले पटाखों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में रिहायशी इलाके में इस तरह के ज्वलनशील पदार्थों के निर्माण और रखरखाव को लेकर अब प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
अमरुद्दीन के मकान में आग के बाद शुरू हुआ धमाकों का सिलसिला
जानकारी के अनुसार, मो. अमरुद्दीन के मकान में रखे पटाखों में शुक्रवार शाम आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और इसके बाद तेज धमाकों का सिलसिला शुरू हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के उन मकानों तक भी आग पहुंची, जहां पटाखा निर्माण का काम किया जाता था।
धमाकों की आवाज देर शाम तक सुनाई देती रही। लगातार हो रहे विस्फोटों के कारण घटनास्थल पर पहुंची दमकल और राहत टीमों के लिए आग पर काबू पाना और सुरक्षित तरीके से बचाव अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण बना रहा।
जिस मकान में विस्फोट हुआ, वह दो मंजिला पक्का मकान बताया गया है। इसमें अमरुद्दीन और उनके बेटे का परिवार रहता था। हादसे के बाद आसपास रहने वाले लोगों में भी दहशत फैल गई और लोग अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए।
हादसे से करीब दो घंटे पहले बाजार गए थे अमरुद्दीन
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना से करीब दो घंटे पहले अमरुद्दीन बाइक से बड़हरिया बाजार गए थे। बताया गया कि उन्होंने वहां एक ऑटो रिक्शा रुकवाया और कुछ बातचीत करने के बाद वापस अपने घर लौट गए थे।
इसके कुछ समय बाद ही उनके मकान में रखे पटाखों में आग लग गई और देखते ही देखते स्थिति भयावह हो गई। हादसे की परिस्थितियों को लेकर प्रशासन अब विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहा है।
परिवार पहले भी झेल चुका है पटाखा हादसे का दंश
आलमपुर की इस घटना ने अमरुद्दीन के परिवार के पुराने जख्म भी ताजा कर दिए हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, वर्ष 2003 में पटाखा बनाने के दौरान अमरुद्दीन के एक बेटे की मौत हो चुकी थी। इसके अलावा उनके बड़े बेटे आजाद आलम की वर्ष 2024 में हत्या कर दी गई थी।
आजाद आलम का शव जीबी नगर थाना क्षेत्र के पिपरा गांव के चंवर से बरामद हुआ था। उनकी हत्या के मामले में कारणों को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं और अनुसंधान की जानकारी दी गई थी।
रिहायशी इलाके में पटाखा निर्माण पर अब सबसे बड़ा सवाल
आलमपुर विस्फोट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिहायशी इलाके में पटाखा निर्माण और ज्वलनशील सामग्री के भंडारण की अनुमति किन परिस्थितियों में थी और वहां सुरक्षा मानकों का कितना पालन हो रहा था।
स्थानीय लोगों के अनुसार गांव के कई घरों में पटाखे बनाने का काम होता है। ऐसे में प्रशासन के सामने अब यह पता लगाना अहम होगा कि संबंधित प्रतिष्ठानों या घरों के पास पटाखा निर्माण, भंडारण अथवा बिक्री से जुड़े वैध लाइसेंस थे या नहीं और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में मामले की जांच शुरू कर दी गई है। एफएसएल टीम सहित संबंधित एजेंसियां विस्फोट के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं।
14 एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं, प्रशासन ने संभाला मोर्चा
हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य के लिए 14 एंबुलेंस मौके पर भेजी गईं। जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा, पुलिस अधीक्षक भारत सोनी और सिविल सर्जन समेत प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं।
दमकलकर्मियों ने मकान में लगी आग पर काबू पाने का प्रयास किया। लगातार धमाकों और घटनास्थल पर जमा भीड़ के बीच राहत कार्य को व्यवस्थित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी रही।
विस्फोट की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों की जानकारी लेने के लिए परेशान रहे। भीड़ बढ़ने पर पुलिस ने शाम करीब 7:45 बजे माइकिंग कर लोगों से वापस लौटने की अपील की, ताकि राहत और बचाव अभियान में किसी तरह की बाधा न आए।
फिलहाल प्रशासन की जांच का केंद्र विस्फोट की वास्तविक वजह, पटाखों के निर्माण एवं भंडारण की स्थिति और सुरक्षा मानकों के पालन पर है। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि रिहायशी इलाकों में पटाखा निर्माण जैसी गतिविधियों पर निगरानी और सुरक्षा नियमों का पालन कितना प्रभावी है।
