UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर के बीच बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की विपक्षी एकता और साथ आने की अपील पर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है।
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव लंबे समय से संविधान के खतरे में होने की बात कर रहे हैं, जबकि उनके मुताबिक संविधान सुरक्षित है और राजनीतिक तौर पर अखिलेश यादव खुद खतरे में हैं।
अखिलेश यादव के बयान पर राजभर का पलटवार
दरअसल, अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में विपक्षी दलों और पुराने साथियों से एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि अगर किसी को लगता है कि लोकतंत्र, संविधान और अर्थव्यवस्था पर हमला हो रहा है, तो राज्यसभा चुनाव से पहले साथ आने का यह मौका है।
अखिलेश ने पुरानी गलतियों को भुलाकर साथ खड़े होने की बात भी कही थी।
इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राजभर का कहना है कि 2017 से अखिलेश संविधान के खतरे में होने की बात कर रहे हैं, जबकि संविधान सुरक्षित है।
उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में अखिलेश को चुनावी तौर पर समर्थन देने वाला कौन है और वे कहां से जीत हासिल करेंगे। यह राजभर का राजनीतिक दावा है, जिसे उन्होंने अपने बयान में रखा है।
‘मुस्लिम को मुख्यमंत्री का चेहरा क्यों नहीं बनाया?’
ओपी राजभर ने अपने बयान में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय के समर्थन से यादव नेताओं को कई बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला, लेकिन सपा नेतृत्व ने कभी किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर आगे नहीं किया।
राजभर ने अखिलेश यादव के ‘भाईचारे के चुनाव’ वाले बयान पर भी टिप्पणी की और इसे ‘दौलत का चुनाव’ बताया। उनके इस बयान का मकसद सपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाना था।
PDA फॉर्मूले पर भी राजभर का हमला
राजभर ने समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने परिवारवाद और सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों का संदर्भ देते हुए PDA की अपनी राजनीतिक व्याख्या पेश की।
इससे पहले भी राजभर सपा के PDA फॉर्मूले पर सवाल उठाते रहे हैं। एक दिन पहले भी उन्होंने रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी का नाम लेते हुए सपा की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति पर सवाल खड़े किए थे।
2017 और 2022 के चुनावों का भी किया जिक्र
ओपी राजभर ने अपने बयान में 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2017 में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जबकि 2022 में उनकी पार्टी सपा के साथ थी।
राजभर ने 2022 में सपा के प्रदर्शन का श्रेय अपनी पार्टी के समर्थन को भी दिया और कई जिलों की सीटों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनकी वजह से सपा को फायदा हुआ। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अखिलेश यादव के साथ राजनीतिक समर्थन की स्थिति पहले जैसी नहीं है। ये दावे राजभर द्वारा किए गए राजनीतिक दावे हैं।
2027 से पहले तेज हो रही सियासी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।
अखिलेश यादव जहां विपक्षी एकजुटता और लोकतंत्र-सम्बंधी मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा सरकार के मंत्री ओपी राजभर सपा की रणनीति, PDA और अखिलेश यादव के नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव का दौर इस राजनीतिक टकराव को और चर्चा में ला रहा है। आने वाले दिनों में सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के बीच समीकरण को लेकर भी बयानबाजी बढ़ने की संभावना है, हालांकि इन बयानों से किसी चुनावी नतीजे का निष्कर्ष निकालना अभी संभव नहीं है।
