नई दिल्ली: आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी INDIA ब्लॉक ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आगे की रणनीति तय की है।
बुधवार को नई दिल्ली में हुई करीब साढ़े तीन घंटे की बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं ने संयुक्त आंदोलन और देशव्यापी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की।
बैठक की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सुप्रिया सुले और कई अन्य विपक्षी नेताओं एवं प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ऑनलाइन जुड़े।
2 अक्टूबर से ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’
बैठक के बाद विपक्षी दलों ने 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देशभर में जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकालने की घोषणा की। इसके अलावा INDIA ब्लॉक के सांसद 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्यालय तक मार्च करेंगे।
विपक्षी दलों का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच उठाया जाएगा। हालांकि, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए SIR प्रक्रिया का बचाव किया गया है।
राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी
बैठक में विपक्षी नेताओं ने SIR से जुड़े विवाद को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का समय मांगने का फैसला भी किया है। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट को संयुक्त पत्र लिखकर संबंधित मामलों के जल्द निपटारे की मांग करने की बात सामने आई है।
अक्टूबर और नवंबर में संयुक्त रैलियों का कार्यक्रम
INDIA ब्लॉक की बैठक में देश के अलग-अलग हिस्सों में संयुक्त रैलियां आयोजित करने की योजना पर भी सहमति बनी। बैठक के बाद सामने आए कार्यक्रम के मुताबिक अक्टूबर में अलग-अलग स्थानों पर रैलियां होंगी और 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी संयुक्त रैली आयोजित करने की घोषणा की गई है। इसके बाद हैदराबाद, कोलकाता और बेंगलुरु समेत अन्य शहरों में भी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
इन कार्यक्रमों का मुख्य फोकस विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे ‘वोट चोरी’, SIR और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दों पर रहेगा। ये आरोप विपक्षी दलों के हैं और इन पर चुनाव आयोग तथा सरकार का पक्ष अलग है।
बैलेट पेपर की मांग फिर उठी
बैठक में EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई गई। INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियों के बीच इस मांग को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
यह मुद्दा विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है। चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का विरोध किया गया है।
कौन-कौन से नेता बैठक में शामिल हुए?
बैठक में विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सुप्रिया सुले, एमए बेबी समेत अन्य नेता शामिल थे।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (UBT), RJD, वाम दलों और जम्मू-कश्मीर की पार्टियों समेत कई दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अखिलेश यादव बैठक में नहीं पहुंचे
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए। इससे पहले उनकी पार्टी की ओर से बताया गया था कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से जुड़ी व्यस्तताओं के कारण वह बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे और पार्टी की ओर से प्रतिनिधि भेजे जाएंगे।
वहीं, रिपोर्टों के अनुसार DMK और आम आदमी पार्टी भी बैठक में शामिल नहीं हुईं। DMK ने INDIA ब्लॉक से अपने संबंधों को लेकर अलग रुख जाहिर किया है, जबकि AAP की बैठक में मौजूदगी नहीं रही।
आगे क्या होगा?
बैठक के बाद विपक्षी दलों ने आने वाले हफ्तों के लिए प्रदर्शन, मार्च, रैलियों और संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अपनी मांग रखने का कार्यक्रम तय किया है। 2 अक्टूबर से जिला स्तर के कार्यक्रमों के बाद 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग तक मार्च और नवंबर में संयुक्त रैली की योजना है।
इस पूरे अभियान का केंद्र SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे रहेंगे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं करते और SIR प्रक्रिया का बचाव कर रहे हैं।
इसलिए आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
