आज के दौर में साइबर अपराध केवल मोबाइल हैक करने या OTP चुराने तक सीमित नहीं रह गया है। ठग अब लोगों को मानसिक दबाव में डालकर लाखों रुपये ठग रहे हैं। इस नए तरीके को Digital Arrest Scam कहा जा रहा है। देश के कई शहरों में इस तरह के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और आम लोगों के साथ-साथ डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और रिटायर्ड अधिकारी भी इसका शिकार बन चुके हैं।
आखिर Digital Arrest होता क्या है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत में “Digital Arrest” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया मौजूद ही नहीं है।
साइबर ठग खुद को CBI, ED, NCB, RBI, TRAI, पुलिस या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। इसके बाद वे दावा करते हैं कि आपके आधार कार्ड, बैंक खाते या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी अपराध में हुआ है।
इसके बाद शुरू होता है मानसिक दबाव बनाने का खेल।
ठग कैसे फंसाते हैं?
अधिकतर मामलों में पीड़ित को कहा जाता है—
- आपका आधार कार्ड अपराध में इस्तेमाल हुआ है।
- आपके नाम से फर्जी बैंक खाता खुला है।
- आपका मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है।
- आपको तुरंत वीडियो कॉल पर रहना होगा।
- किसी से बात की तो गिरफ्तारी होगी।
इसके बाद ठग नकली आईडी कार्ड, फर्जी वारंट और सरकारी लोगो दिखाकर लोगों को डराते हैं।
पैसे कैसे निकलवाते हैं?
जब व्यक्ति डर जाता है तो उससे कहा जाता है कि जांच पूरी होने तक अपना पैसा “Verification Account” में ट्रांसफर कर दें।
यहीं सबसे बड़ी ठगी होती है।
जैसे ही पैसा ट्रांसफर होता है, साइबर अपराधी गायब हो जाते हैं।
सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
अधिकतर लोग सरकारी एजेंसी का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं।
डर की वजह से वे बिना सोचे-समझे ठगों की हर बात मान लेते हैं।
यही साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी रणनीति होती है।
कैसे पहचानें कि कॉल फर्जी है?
अगर कोई व्यक्ति—
- वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर करे।
- तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहे।
- गिरफ्तारी की धमकी दे।
- किसी से बात न करने को कहे।
- सरकारी अधिकारी बनकर WhatsApp पर बात करे।
तो समझ जाइए कि मामला संदिग्ध है।
अगर ऐसा कॉल आए तो क्या करें?
- बिल्कुल घबराएं नहीं।
- कोई पैसा ट्रांसफर न करें।
- OTP या बैंक डिटेल साझा न करें।
- कॉल तुरंत काट दें।
- नजदीकी पुलिस स्टेशन या Cyber Crime Portal पर शिकायत करें।
- हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?
AI, Deepfake और Voice Cloning जैसी तकनीकों के आने के बाद साइबर अपराधियों के लिए लोगों को धोखा देना पहले से आसान हो गया है।
इसी वजह से सरकार लगातार लोगों को जागरूक रहने की सलाह दे रही है।
निष्कर्ष
Digital Arrest नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे मांगता है या गिरफ्तारी की धमकी देता है, तो सतर्क हो जाएं। थोड़ी-सी समझदारी आपकी वर्षों की मेहनत की कमाई बचा सकती है।
