‘मिर्जापुर: द मूवी’ और ‘Hanuman Ansh’ ने बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसा मुकाबला देखने को दिया, जिसकी चर्चा फिल्म इंडस्ट्री में लगातार होती रही है।
एक तरफ अपराध, हिंसा और जटिल किरदारों की दुनिया वाली मिर्जापुर थी, तो दूसरी ओर आस्था और आध्यात्मिकता पर आधारित Hanuman Ansh ने दर्शकों के बीच अपनी अलग जगह बनाई।
हनुमान अंश की बढ़ती स्क्रीन संख्या को देखते हुए यह सवाल भी उठा कि क्या इसका असर मिर्जापुर: द मूवी की कमाई पर पड़ा?
अब इस सवाल पर ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के निर्देशक गुरमीत सिंह ने अपनी राय सामने रखी है। उनके मुताबिक दोनों फिल्मों की तुलना सीधे तौर पर करना सही नहीं होगा, क्योंकि दोनों का जॉनर, ट्रीटमेंट और दर्शकों से जुड़ने का तरीका बिल्कुल अलग है।
‘हनुमान अंश’ से नहीं मानते गुरमीत सिंह को कोई सीधी परेशानी
इंडिया टुडे के साथ बातचीत में गुरमीत सिंह ने हनुमान अंश की सफलता को किसी एक फिल्म के लिए नुकसान के तौर पर देखने के बजाय इसे सिनेमाघरों के लिए सकारात्मक संकेत बताया।
उनका कहना था कि एक ही दौर में अलग-अलग तरह की फिल्में दर्शकों को पसंद आ सकती हैं और हर फिल्म के लिए अपना दर्शक वर्ग मौजूद है।
दरअसल, हनुमान अंश की अप्रत्याशित सफलता के बाद उसके स्क्रीन्स में इजाफा हुआ था। इसी वजह से ट्रेड सर्कल में यह चर्चा शुरू हुई कि क्या बढ़ती स्क्रीन हिस्सेदारी ने मिर्जापुर: द मूवी के संभावित कारोबार को प्रभावित किया। हालांकि, गुरमीत सिंह ने इस बात को सीधे तौर पर फिल्म की कमाई में आई किसी कमी से नहीं जोड़ा।
दोनों फिल्मों की कहानी और दर्शक बिल्कुल अलग
गुरमीत सिंह ने दोनों फिल्मों के अंतर को भी रेखांकित किया। ‘हनुमान अंश’ आस्था और आध्यात्मिकता के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि मिर्जापुर: द मूवी अपराध, हिंसा और नैतिक रूप से जटिल किरदारों वाली दुनिया को सामने रखती है। यानी दोनों फिल्मों का कंटेंट एक-दूसरे से काफी अलग है।
यही वजह है कि निर्देशक के नजरिए में दोनों फिल्मों का एक साथ अच्छा प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि थिएटर में अलग-अलग तरह की कहानियों के लिए दर्शक मौजूद हैं। उनके मुताबिक दर्शकों की पसंद को सिर्फ एक जॉनर तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।
‘हनुमान अंश’ के निर्देशक से है गुरमीत सिंह का पुराना कनेक्शन
गुरमीत सिंह ने हनुमान अंश की सफलता पर निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को बधाई भी दी। उन्होंने बताया कि वह विशाल को पहले से जानते हैं और दोनों ने 2013 में साथ मिलकर दो वीडियो पर काम किया था। गुरमीत ने फिल्म की सफलता को विशाल और उनकी टीम के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
यह कनेक्शन इस बातचीत को इसलिए भी खास बनाता है क्योंकि गुरमीत सिंह खुद एक सफल फ्रेंचाइजी को बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं, जबकि हनुमान अंश ने अपनी अलग शैली के बावजूद दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बनाई।
‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी के भविष्य पर भी बोले डायरेक्टर
बातचीत के दौरान गुरमीत सिंह से ‘मिर्जापुर’ के भविष्य को लेकर भी सवाल किया गया। निर्देशक ने संकेत दिया कि फ्रेंचाइजी के आगे भी लौटने की संभावना है, लेकिन उन्होंने किसी विशेष अगले प्रोजेक्ट या सीजन को लेकर फिलहाल स्पष्ट घोषणा करने से परहेज किया।
उन्होंने कहा कि कई पक्षों से जुड़े फैसले होने हैं और सही समय पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
गुरमीत सिंह के बयान से इतना जरूर साफ है कि वह हनुमान अंश की सफलता को मिर्जापुर के लिए सीधी चुनौती के रूप में नहीं देख रहे। उनके मुताबिक दो बिल्कुल अलग फिल्मों का एक साथ दर्शकों तक पहुंचना थिएटर बिजनेस की विविधता को दिखाता है।
निष्कर्ष
बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों के बीच स्क्रीन और दर्शकों को लेकर प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक है, लेकिन ‘हनुमान अंश’ ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की कमाई को सीधे तौर पर प्रभावित किया, ऐसा निष्कर्ष गुरमीत सिंह के बयान से नहीं निकलता।
निर्देशक ने दोनों फिल्मों को अलग-अलग दर्शक वर्ग और अलग सिनेमाई अनुभव वाली फिल्में बताया है। ऐसे में इस पूरे मामले को सीधी टक्कर के बजाय एक ही समय में अलग जॉनर की फिल्मों की सफलता के तौर पर देखना उनके बयान के अधिक करीब है।
