मुरादाबाद: SC-ST एक्ट के तहत दर्ज एक मुकदमे में मुरादाबाद के पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने मुरादाबाद की एससी-एसटी अदालत में चल रही मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
मामला मूंढापांडे थाने में दर्ज उस प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें गागन वाली नहर मैनाठेर निवासी दीपक ने रामपुर के पटवाई थाना क्षेत्र के रहटगंज निवासी रिंकू सिंह, मुरादाबाद के धतुर्रा मेघानगला निवासी राजेश सिंह और राजेश के पिता करन सिंह को नामजद किया था।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद तीनों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया था। इसके बाद एससी-एसटी न्यायालय ने आरोपियों को तलब किया। इसी आदेश के खिलाफ रिंकू सिंह ने अधिवक्ता हाजी कमाल अख्तर के जरिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
राजस्थान की कंपनी में साथ करते थे काम
रिंकू सिंह की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि शिकायतकर्ता दीपक, रिंकू और राजेश सिंह राजस्थान के अलवर जिले में लेंस कार्ट कंपनी में साथ काम करते थे। अधिवक्ता के मुताबिक, कंपनी ने काम ठीक नहीं करने पर दीपक को नौकरी से हटा दिया था।
इसके बाद दीपक दोनों साथियों पर दोबारा नौकरी लगवाने के लिए दबाव बना रहा था। आरोप है कि जब उसकी बात नहीं बनी तो उसने मुरादाबाद आकर तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि प्राथमिकी में जिस घटना का जिक्र है, वह राजस्थान में हुई बताई गई है। ऐसे में इस मामले की सुनवाई मुरादाबाद की अदालत में हो सकती है या नहीं, इस पर भी सवाल उठता है।
मेडिकल रिपोर्ट और स्वतंत्र गवाह का भी मुद्दा
याचिका में कहा गया कि शिकायतकर्ता के अलावा घटना का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। मारपीट के आरोपों के समर्थन में मेडिकल परीक्षण से जुड़ा कोई दस्तावेज भी पेश नहीं किया गया है।
इन बिंदुओं को आधार बनाकर रिंकू सिंह की ओर से पुलिस द्वारा दाखिल आरोप पत्र और निचली अदालत के तलबी आदेश को चुनौती दी गई थी।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद की एससी-एसटी अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया। इससे रिंकू सिंह, राजेश सिंह और करन सिंह को फिलहाल राहत मिली है।
मामले में हाईकोर्ट के आगे के आदेश के अनुसार ही मुकदमे की अगली कार्यवाही तय होगी।
