एक बयान और तमिलनाडु की राजनीति में फिर तेज हुई तकरार
तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी और मुख्यमंत्री विजय के बीच चल रही जुबानी जंग अब एक नए विवाद में बदल गई है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उनके परिवार को लेकर टिप्पणी की, जिसके बाद उनके बयान पर चौतरफा प्रतिक्रिया सामने आने लगी।
मामला इतना बढ़ा कि बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई को भी सार्वजनिक तौर पर बयान की आलोचना करनी पड़ी। अन्नामलाई ने साफ कहा कि राजनीतिक विरोधियों की नीतियों और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन परिवार को व्यक्तिगत हमले का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
विजय के पुराने बयान का जवाब देने के चक्कर में बढ़ी बात
इस विवाद को समझने के लिए कुछ महीने पीछे जाना होगा।
विजय ने जून में विधानसभा में एक राजनीतिक टिप्पणी की थी, जिसे विपक्ष के नेता उधयनिधि स्टालिन और उनके पिता एमके स्टालिन को लेकर तंज माना गया था। नागेंद्रन ने 15 अगस्त को उसी संदर्भ को उठाकर विजय पर पलटवार किया।
लेकिन इस बार बीजेपी नेता की टिप्पणी राजनीतिक सवाल से आगे निकलकर विजय की मां तक पहुंच गई। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक बयान की आलोचना शुरू हो गई।
अन्नामलाई ने क्यों किया विरोध?
इस पूरे विवाद में अन्नामलाई की प्रतिक्रिया सबसे ज्यादा चर्चा में रही। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं। सरकार की नीतियों, फैसलों और कामकाज की आलोचना भी होनी चाहिए।
लेकिन किसी नेता के परिवार को निशाना बनाना अलग बात है।
अन्नामलाई ने खासतौर पर मां को राजनीतिक बयानबाजी में घसीटने पर आपत्ति जताई और कहा कि नेताओं को अपने शब्दों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने इस तरह की भाषा को तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति के लिए ठीक नहीं बताया।
TVK ने मांगी माफी की मांग
विजय की पार्टी TVK ने भी नागेंद्रन के बयान को लेकर विरोध दर्ज कराया। पार्टी की ओर से इसे व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी बताया गया।
TVK नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मुकाबला मुद्दों और नीतियों के आधार पर होना चाहिए। परिवार को लेकर टिप्पणी करना राजनीतिक बहस का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
विवाद के बीच एक महिला वकील द्वारा पुलिस महानिदेशक कार्यालय में शिकायत दिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
कांग्रेस और तमिलनाडु सरकार के नेताओं ने भी साधा निशाना
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस और तमिलनाडु सरकार के नेताओं ने भी नागेंद्रन पर निशाना साधा।
तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने बयान को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की। सरकार के मंत्रियों ने भी कहा कि राजनीतिक नेताओं को अपने पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
इस तरह एक बीजेपी नेता के बयान ने तमिलनाडु की अलग-अलग राजनीतिक धाराओं को एक मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर कर दिया।
नागेंद्रन का पलटवार और फिर सफाई
नागेंद्रन की ओर से बाद में सफाई आई कि उनके बयान को सही संदर्भ में नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उनका किसी को नुकसान पहुंचाने का उद्देश्य नहीं था।
हालांकि, विवाद तब तक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका था।
