नेपाल फ्लैश फ्लड को लेकर अब तक सामने आ रही तस्वीर में बड़ा बदलाव हुआ है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शुरुआती तौर पर इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के नए विश्लेषण ने इस संभावना को खारिज कर दिया है। USGS के मुताबिक जिस भूकंपीय गतिविधि को पहले 4.4 तीव्रता के भूकंप के तौर पर रिपोर्ट किया गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर के टूटने और उसके साथ हुए मलबे के बहाव से पैदा हुई थी। इस घटना के बाद पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर गया, जिसने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचा दी।
पहले भूकंप को माना जा रहा था वजह
बाढ़ आने के शुरुआती घंटों में नेपाल-चीन सीमा के पास भूकंप की खबर सामने आई थी। इसी आधार पर आशंका जताई गई कि भूकंप के झटकों से पहाड़ का हिस्सा खिसका और इसके बाद नदी का रास्ता प्रभावित होने से अचानक बाढ़ आई। हालांकि बाद में उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों और भौगोलिक आंकड़ों का दोबारा विश्लेषण किया गया। इसके बाद USGS ने अपनी शुरुआती व्याख्या में बदलाव करते हुए इसे सामान्य भूकंप के बजाय ग्लेशियर के टूटने से जुड़ी घटना बताया।
ग्लेशियर टूटने के बाद कैसे आई इतनी बड़ी बाढ़?
विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ी इलाके में ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इसके साथ बर्फ, चट्टान और मलबा भी तेजी से नीचे की तरफ आया। इस मलबे ने नदी के बहाव को प्रभावित किया और इसके बाद पानी तथा मलबे का एक बेहद शक्तिशाली प्रवाह नीचे की ओर बढ़ा। इसी प्रक्रिया ने फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया और नदी के किनारे बसे इलाकों में भारी नुकसान हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में भी ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटकर नीचे गिरने के संकेत मिले हैं।
5.2 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि दर्ज हुई, लेकिन वजह अलग थी
USGS के अनुसार इस घटना के दौरान 5.2 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि दर्ज हुई थी। इसी वजह से शुरुआत में इसे भूकंप समझे जाने की संभावना बनी। लेकिन बाद के विश्लेषण में पाया गया कि यह गतिविधि ग्लेशियर के टूटने और मलबे के अचानक खिसकने से पैदा हुई थी। यानी जमीन में दर्ज हुई हलचल को भूकंप मानना सही नहीं था।
नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही
ग्लेशियर टूटने के बाद पैदा हुए मलबे और पानी के तेज बहाव ने नेपाल के रसुवा और नुवाकोट समेत कई इलाकों को प्रभावित किया। कई जगह सड़कें, पुल, मकान और दूसरी बुनियादी सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। सीमा के दूसरी तरफ तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में भी बाढ़ और मलबे ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
सैकड़ों लोग अब भी लापता
इस आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ लापता लोगों की तलाश जारी है। प्रभावित क्षेत्र में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और पर्यटक भी मौजूद थे। नेपाल में लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि राहत और खोज अभियान जारी रहने के कारण अलग-अलग समय पर सामने आने वाले आंकड़ों में बदलाव हो रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी टीमें
बाढ़ और मलबे के कारण कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। नेपाल में सेना और सुरक्षा बलों के साथ राहत दल बचाव अभियान चला रहे हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से भी प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। कुछ क्षेत्रों में बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत कार्य और मुश्किल हो गया है।
हिमालयी इलाकों में बढ़ता प्राकृतिक खतरा
विशेषज्ञ इस घटना को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की बदलती स्थिति से जोड़कर भी देख रहे हैं। बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और उनके अस्थिर होने का खतरा बढ़ रहा है। हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताने से पहले वैज्ञानिक विश्लेषण जरूरी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म होते हिमालय में ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं का जोखिम गंभीर चिंता का विषय है।
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर दिखाया है कि हिमालयी इलाकों में प्राकृतिक घटनाएं कितनी तेजी से बड़े संकट में बदल सकती हैं। इस मामले में शुरुआती तौर पर भूकंप को वजह माना गया था, लेकिन USGS के नए विश्लेषण के बाद ग्लेशियर टूटने और उसके बाद हुए मलबे के बहाव को इस आपदा का प्रमुख कारण माना जा रहा है। राहत एवं बचाव अभियान के आगे बढ़ने के साथ घटना से जुड़ी तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
