नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना अब अदालत तक पहुंच गई है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की गई, जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने मामले को आज सुनने पर सहमति जताई है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने ढही हुई इमारत के मालिक हरि ओम बंसल/हरिराम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है।
सत्य निकेतन में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। इमारत में पीजी संचालित होने की जानकारी सामने आई है। हादसे में कई लोगों की मौत हुई और कई लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के बाद से ही पुलिस, दमकल और अन्य बचाव एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी थीं।
हादसे के बाद हाई कोर्ट में मामला पहुंचा
सोमवार को एक वकील ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने मामले का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आज सुनवाई के लिए इसे स्वीकार किया।
हादसे से जुड़े मामले में अब अदालत के सामने इमारत की स्थिति, निर्माण और मरम्मत से जुड़े पहलुओं के अलावा प्रशासनिक स्तर पर हुई संभावित लापरवाही का मुद्दा भी आ सकता है।
मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। पुलिस की टीमें आरोपी की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर दबिश दे रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस के पास मालिक के पासपोर्ट की जानकारी भी उपलब्ध है।
पुलिस ने इस मामले में इमारत के मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। इसमें गैर इरादतन हत्या और लापरवाही समेत गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। हालांकि मामले में आरोपों की अंतिम जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत
जांच में सामने आया है कि ढही हुई इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट यानी पीजी आवास के तौर पर किया जा रहा था। सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के आसपास होने के कारण छात्रों के लिए पीजी और किराये के आवास का प्रमुख इलाका माना जाता है।
रिपोर्टों के मुताबिक इमारत में मरम्मत और निर्माण से जुड़े काम भी चल रहे थे। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन कामों का इमारत की मजबूती पर कोई असर पड़ा था या नहीं।
निर्माण और मरम्मत को लेकर भी उठे सवाल
हादसे के बाद इमारत की संरचना और उसमें किए गए बदलाव जांच के घेरे में हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इमारत में अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण और मरम्मत कार्य से जुड़े सवाल उठे हैं। यह भी जांच का विषय है कि निर्माण या मरम्मत के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं और भवन सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
कुछ रिपोर्टों में इमारत में दरार और पानी जमा होने जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन सभी पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
MCD ने भी शुरू की कार्रवाई
हादसे के बाद नगर निगम ने आसपास की इमारतों और अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार, एक समीपवर्ती महिला पीजी को सील किया गया है और चार मंजिल से अधिक के अवैध निर्माण को सील करने का आदेश दिया गया है।
इसके अलावा हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत के निर्माण, मरम्मत और पीजी के संचालन में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
अब जांच और अदालत की सुनवाई पर नजर
सत्य निकेतन हादसे के बाद अब पुलिस जांच के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। दिल्ली पुलिस मालिक और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जबकि हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई से हादसे से जुड़े प्रशासनिक और सुरक्षा पहलुओं पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि इमारत आखिर क्यों ढही और क्या इसे रोकने के लिए समय रहते जरूरी सुरक्षा कदम उठाए गए थे। पुलिस की जांच, मजिस्ट्रियल जांच और अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ने के साथ हादसे की जिम्मेदारी और लापरवाही से जुड़े सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।
