रसोई के जरूरी सामान की कीमतों में तेजी ने सितंबर में एक बार फिर घरों का बजट प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दाल, खाद्य तेल और प्याज जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। सरकारी Price Monitoring System के 22 सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अरहर दाल का औसत खुदरा भाव 124.92 रुपये किलो, प्याज 54.20 रुपये किलो और सनफ्लावर ऑयल 193.97 रुपये किलो दर्ज किया गया।
महंगाई का दबाव सिर्फ बाजार के रोजाना भाव में ही नहीं दिख रहा है। अगस्त 2026 में देश की खाद्य महंगाई दर 5.95 फीसदी रही, जो जुलाई के 5.52 फीसदी से ज्यादा है। इसी अवधि में खुदरा महंगाई भी 4.45 फीसदी से बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई। यानी खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी अब व्यापक महंगाई के आंकड़ों में भी दिखाई दे रही है।
दालों के भाव में क्या बदलाव आया?
22 सितंबर के सरकारी आंकड़ों में अरहर दाल का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 124.92 रुपये प्रति किलो रहा। उड़द दाल 123.08 रुपये, मूंग दाल 112.40 रुपये और मसूर दाल 90.34 रुपये किलो दर्ज की गई। चना दाल का औसत भाव 88.63 रुपये किलो रहा।
ABP की रिपोर्ट में भी अरहर दाल की कीमत को लेकर तेजी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अरहर दाल का भाव एक साल पहले के करीब 113.66 रुपये किलो से बढ़कर 124.23 रुपये किलो के आसपास पहुंच गया था। सरकारी 22 सितंबर के आंकड़े में यह औसत भाव 124.92 रुपये किलो दर्ज हुआ है। अलग-अलग तारीखों और डेटा अपडेट के कारण मामूली अंतर दिखाई दे सकता है।
प्याज ने बढ़ाई रसोई की चिंता
प्याज भी इस समय घरेलू बजट पर दबाव डालने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है। 22 सितंबर को इसका अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 54.20 रुपये किलो दर्ज किया गया। टमाटर 39.32 रुपये और आलू 23.14 रुपये किलो के औसत भाव पर रहा।
प्याज की कीमत में सालाना आधार पर भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। Business Standard की सितंबर की रिपोर्ट में अगस्त के दौरान प्याज के भाव में करीब 50 फीसदी सालाना वृद्धि का उल्लेख किया गया था। Crisil के सितंबर के विश्लेषण में भी अगस्त 2026 में प्याज की कीमत करीब 43 फीसदी सालाना बढ़ने की बात कही गई थी।
खाने के तेल की कीमत भी ऊंची
खाद्य तेलों की कीमतों में भी लगातार दबाव बना हुआ है। 22 सितंबर के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मूंगफली तेल का औसत खुदरा भाव 209.58 रुपये किलो, सरसों तेल 202.68 रुपये, सोया तेल 166.97 रुपये, सनफ्लावर ऑयल 193.97 रुपये और पाम ऑयल 153.03 रुपये किलो रहा।
Reuters की 16 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले एक साल में वनस्पति तेलों की कीमतों में करीब 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। भारत अपनी खाद्य तेल जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं खाने-पीने के सामान के दाम?
खाद्य महंगाई के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। कमजोर मानसून और बारिश की कमी से खरीफ फसलों की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका असर दालों और तिलहन जैसी फसलों की कीमतों पर पड़ सकता है।
Business Standard की रिपोर्ट में जून से सितंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश, फसलों की बुआई की स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों को खाद्य कीमतों के लिए जोखिम बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऊर्जा और भू-राजनीतिक तनाव से कृषि और परिवहन लागत पर दबाव पड़ सकता है।
Economic Times की कृषि रिपोर्ट में भी कम बारिश के कारण तूर, चना और कुछ तिलहनों की कीमतों में तेजी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बारिश की कमी से मौजूदा खरीफ फसल और आने वाली रबी फसल के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।
खाद्य महंगाई 5.95 फीसदी पर पहुंची
सरकार के अगस्त 2026 के CPI आंकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई 5.95 फीसदी रही। ग्रामीण इलाकों में यह दर 6.13 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 5.64 फीसदी रही। जुलाई में अखिल भारतीय खाद्य महंगाई 5.52 फीसदी थी।
अगस्त में प्याज, अदरक और लहसुन जैसी कुछ खाद्य वस्तुओं में कीमतों का दबाव खास तौर पर देखने को मिला। वहीं कुछ दूसरी सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा। इसका मतलब यह है कि हर खाद्य वस्तु महंगी नहीं हुई है, लेकिन कई जरूरी वस्तुओं में तेजी ने कुल खाद्य महंगाई को ऊपर धकेला है।
त्योहारों से पहले बढ़ सकती है मांग
सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ खाद्य तेल, चीनी और अन्य किराना सामान की मांग आम तौर पर बढ़ती है। Business Standard ने भी त्योहारी सीजन के दौरान खाने के तेल और चीनी की मांग बढ़ने की संभावना का उल्लेख किया है।
ऐसे में अगर घरेलू उत्पादन, मौसम और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े दबाव बने रहते हैं, तो आने वाले हफ्तों में रसोई के बजट पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि किसी एक वस्तु की कीमत आगे कितनी बढ़ेगी, इसका अनुमान मौजूदा आंकड़ों से निश्चित रूप से नहीं लगाया जा सकता।
सरकारी आंकड़ों में 22 सितंबर का औसत भाव
| सामान | अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव |
|---|---|
| अरहर दाल | ₹124.92/kg |
| उड़द दाल | ₹123.08/kg |
| मूंग दाल | ₹112.40/kg |
| मसूर दाल | ₹90.34/kg |
| चना दाल | ₹88.63/kg |
| मूंगफली तेल | ₹209.58/kg |
| सरसों तेल | ₹202.68/kg |
| सोया तेल | ₹166.97/kg |
| सनफ्लावर ऑयल | ₹193.97/kg |
| पाम ऑयल | ₹153.03/kg |
| प्याज | ₹54.20/kg |
| टमाटर | ₹39.32/kg |
| आलू | ₹23.14/kg |
ये देशभर के औसत खुदरा भाव हैं। किसी शहर, मंडी या दुकान में वास्तविक कीमत गुणवत्ता, ब्रांड, स्थानीय आपूर्ति और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
स्रोत
भारत सरकार का Department of Consumer Affairs Price Monitoring System, Ministry of Statistics and Programme Implementation (CPI), Business Standard, Reuters, Crisil और अन्य उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार।
