Ballia News। सरयू नदी का जलस्तर घटने के साथ ही सुरेमनपुर दियरांचल में कटान का संकट और विकराल होता जा रहा है। नदी की तेज धारा अब खेतों के बाद रिहायशी इलाकों को भी अपनी चपेट में लेने लगी है।
बैरिया क्षेत्र के गोपालनगर टांडी गांव में मंगलवार को चार रिहायशी मकान सरयू में समा गए, जबकि सात अन्य मकान कटान के मुहाने पर पहुंच गए हैं। हालात ऐसे हैं कि प्रभावित परिवार अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाने में जुटे हैं।
देखते ही देखते नदी में समा गए चार मकान
सरयू की धारा ने गोपालनगर टांडी में कमलेश यादव, रामनरायण यादव, संजय यादव और मंजय यादव के मकानों को अपनी जद में ले लिया। कटान तेज होने के बाद देखते ही देखते इन रिहायशी मकानों का अस्तित्व मिट गया और वे नदी की धार में विलीन हो गए।
कटान की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसपास रहने वाले परिवार अब अपने आशियाने को लेकर आशंकित हैं। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की है।
सात मकान अब कटान के मुहाने पर
चार मकानों के नदी में समाने के बाद खतरा यहीं खत्म नहीं हुआ है। तिलंगी यादव, रामबाबू यादव, बलिराम यादव, शिवजी यादव, महेश यादव, बाबूराम यादव और गणेश यादव के मकान भी अब कटान की सीधी जद में बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरयू की कटान की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो इन मकानों को भी बचाना मुश्किल हो सकता है। नदी लगातार किनारे की मिट्टी को काट रही है और कटान का दायरा धीरे-धीरे आबादी की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
घर बचाने से पहले सामान सुरक्षित करने की जद्दोजहद
कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रभावित परिवारों ने अब घर बचाने के साथ-साथ जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि नदी की धारा ने कुछ और जमीन काटी तो कई परिवारों को अचानक विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है।
सरयू के किनारे बसे इन गांवों में नदी का कटाव कोई नया संकट नहीं है, लेकिन इस बार रिहायशी मकानों तक पहुंचती कटान ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
ग्रामीणों में प्रशासन को लेकर नाराजगी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लगातार कटान होने के बावजूद मंगलवार तक स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी मौके पर स्थलीय निरीक्षण करने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों की चिंता केवल चार मकानों के नदी में समाने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि कटान इसी गति से जारी रहा तो इसका प्रभाव वशिष्ठनगर और गोपालनगर की आबादी तक पहुंच सकता है। यानी आने वाले दिनों में संकट का दायरा और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
खेतों के बाद अब आबादी पर सीधा संकट
सरयू की कटान ने पहले ही बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि को प्रभावित किया है। अब नदी की धारा रिहायशी क्षेत्र की ओर बढ़ रही है। इससे किसानों और ग्रामीण परिवारों के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है—एक ओर खेती की जमीन नदी में समा रही है और दूसरी ओर सिर छिपाने के लिए बना आशियाना भी सुरक्षित नहीं रह गया है।
बलिया के दियरांचल में पहले भी सरयू के जलस्तर और कटान को लेकर ग्रामीणों की मुश्किलें सामने आती रही हैं। हाल के दिनों में जलस्तर में कमी के बावजूद तटवर्ती क्षेत्रों की परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
समय रहते बचाव कार्य जरूरी
मौजूदा हालात में सबसे बड़ी जरूरत कटान प्रभावित क्षेत्र का तत्काल स्थलीय निरीक्षण और प्रभावी बचाव कार्य शुरू करने की है। सात मकानों पर मंडरा रहा खतरा इस बात का संकेत है कि स्थिति को केवल स्थानीय समस्या मानकर टालना भारी पड़ सकता है।
यदि नदी की धारा का रुख आबादी की ओर बना रहा तो आने वाले दिनों में और मकानों तथा कृषि भूमि के कटान की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के साथ-साथ कटान रोकने के लिए ठोस कदम उठाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
सरयू का घटता जलस्तर राहत की खबर जरूर है, लेकिन बलिया के सुरेमनपुर दियरांचल में कटान ने इस राहत को चिंता में बदल दिया है।
चार घर नदी में समा चुके हैं और सात परिवार अपने आशियाने को बचाने की जद्दोजहद में हैं। अब निगाहें प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हैं।
