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Home - राजनीति - Ajay Rai Defamation Case: अजय राय ने CM योगी के खिलाफ दाखिल किया मानहानि का परिवाद, अयोध्या के मछली भोज विवाद ने लिया नया मोड़

Ajay Rai Defamation Case: अजय राय ने CM योगी के खिलाफ दाखिल किया मानहानि का परिवाद, अयोध्या के मछली भोज विवाद ने लिया नया मोड़

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Last updated: सितम्बर 1, 2026 5:28 अपराह्न
By : Desh Darbar
Published on : 2 दिन पहले
Ajay Rai Defamation Case Against Yogi Adityanath
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Ajay Rai Defamation Case: अयोध्या में कथित मछली भोज को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लखनऊ की अदालत में आपराधिक मानहानि का परिवाद दाखिल किया है। अजय राय का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ ऐसे बयान दिए, जिनसे उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। मामला उस विवाद से जुड़ा है, जो 23 अगस्त को अयोध्या में अजय राय के एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर मछली पकाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद बीजेपी नेताओं और संतों की ओर से सवाल उठाए गए, जबकि अजय राय ने खुद मछली खाने से इनकार किया। अब उन्होंने मुख्यमंत्री के बयानों को लेकर कानूनी रास्ता अपनाया है।

अजय राय ने कोर्ट में क्या किया?

अजय राय मंगलवार को लखनऊ की सिविल कोर्ट पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू की और परिवाद दाखिल किया।

अजय राय का कहना है कि मुख्यमंत्री की ओर से उनके बारे में मछली खाने और माफिया के सामने झुकने जैसे आरोप लगाए गए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का दावा है कि इन बयानों का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया और इससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। अजय राय पहले ही मुख्यमंत्री को चुनौती दे चुके हैं कि यदि उनके पास उनके मछली खाने का कोई प्रमाणित फोटो या वीडियो है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने यहां तक कहा था कि आरोप साबित होने पर वह राजनीति छोड़ देंगे।

क्या है अयोध्या का मछली भोज विवाद?

विवाद की शुरुआत 23 अगस्त 2026 को हुई, जब अजय राय अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया और इसके बाद निषाद समाज से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इसी कार्यक्रम से जुड़े एक वीडियो में कथित तौर पर मछली पकाए जाने की तस्वीरें सामने आईं। इसके बाद सवाल उठने लगे कि सावन के महीने में अयोध्या जैसे धार्मिक शहर में मछली भोज का आयोजन क्यों किया गया। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि मछली पकाए जाने और अजय राय के स्वयं मछली खाने के आरोप में अंतर है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अजय राय ने कहा है कि उन्हें कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में क्या पकाया जा रहा था, इसकी जानकारी नहीं थी और उन्होंने खुद मछली नहीं खाई।

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अजय राय बोले- मैं शाकाहारी हूं

विवाद बढ़ने के बाद अजय राय ने लगातार इस आरोप को खारिज किया कि उन्होंने अयोध्या में मछली खाई। एक खुले पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर उनके पास उनके मछली खाने का कोई प्रमाणित फोटो या वीडियो है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। राय ने कहा था कि वह शाकाहारी हैं और आरोप साबित होने पर राजनीति से संन्यास लेने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि जिस कार्यक्रम में वह शामिल हुए थे, वह निषाद समाज के निमंत्रण पर आयोजित था। उनके मुताबिक, कार्यक्रम के बाद आयोजकों ने अपने समाज के लिए भोजन की व्यवस्था की थी और उसमें क्या परोसा गया, उससे उनका कोई संबंध नहीं था।

CM योगी ने अजय राय पर क्या कहा था?

विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अजय राय पर तीखा हमला बोला था। रायबरेली में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अयोध्या में दर्शन के बाद कथित मछली भोज में शामिल होने को लेकर कांग्रेस नेता पर निशाना साधा था। योगी आदित्यनाथ ने इसके साथ अजय राय पर उनके भाई अवधेश राय की हत्या के बाद एक कथित माफिया के सामने झुकने का आरोप भी लगाया था। यही बयान अब अजय राय की कानूनी कार्रवाई का आधार बना है। हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए आरोप और अजय राय की ओर से दिए गए खंडन—दोनों को मामले के संदर्भ में अलग-अलग दावों के तौर पर देखना जरूरी है।

माफिया वाले बयान पर भी अजय राय ने दिया जवाब

अजय राय ने मुख्यमंत्री के उस आरोप को भी खारिज किया, जिसमें उन पर माफिया के सामने झुकने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि उनके भाई और पूर्व विधायक अवधेश राय की हत्या के बाद उन्होंने करीब 32 वर्षों तक न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। उनका कहना है कि इस दौरान उनकी सुरक्षा भी दो बार हटाई गई, लेकिन वह न्याय की लड़ाई से पीछे नहीं हटे। अजय राय ने अपने खुले पत्र में मुख्यमंत्री से प्रदेश के कानून-व्यवस्था, महिलाओं के खिलाफ अपराध, बेरोजगारी, किसानों और महंगाई जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की भी अपील की थी।

BJP और कांग्रेस आमने-सामने

मछली भोज विवाद शुरू होने के बाद से ही बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज है। बीजेपी की ओर से इस घटना को सावन और अयोध्या की धार्मिक संवेदनशीलता से जोड़कर कांग्रेस पर निशाना साधा गया। वहीं कांग्रेस ने आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने का विरोध किया और अजय राय के बचाव में कहा कि वह शाकाहारी हैं। निषाद समाज से जुड़े कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से भी कहा गया कि भोजन को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं है और क्या खाना है, यह व्यक्ति का अधिकार है।

विवाद में अब कानूनी लड़ाई भी शामिल

अब तक यह मामला मुख्य रूप से राजनीतिक बयानबाजी और धार्मिक भावनाओं से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित था। लेकिन अजय राय के अदालत पहुंचने के बाद विवाद का एक नया कानूनी पक्ष सामने आ गया है। मानहानि की कार्यवाही में अदालत के सामने यह सवाल होगा कि अजय राय द्वारा लगाए गए आरोपों और मुख्यमंत्री के बयानों का कानूनी मूल्यांकन किस तरह किया जाता है। परिवाद दाखिल होना अपने आप में आरोपों के सही या गलत होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। आगे की प्रक्रिया अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अगले साल होना है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव पहले से ही तेज है। अयोध्या जैसे धार्मिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर हुआ यह विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। इसलिए आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात यही रहेगी कि राजनीतिक आरोपों से अलग अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाण और कानूनी दलीलें क्या होती हैं।

अब आगे क्या होगा?

अजय राय की ओर से मानहानि का परिवाद दाखिल किए जाने के बाद मामले की अगली दिशा अदालत की प्रक्रिया से तय होगी। दूसरी ओर, अयोध्या के मछली भोज विवाद में मूल सवाल अभी भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है—क्या अजय राय स्वयं उस भोजन में शामिल हुए थे या कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से अलग से भोजन की व्यवस्था की गई थी? अजय राय लगातार मछली खाने के आरोप से इनकार कर रहे हैं और प्रमाण सार्वजनिक करने की चुनौती दे चुके हैं। वहीं बीजेपी इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की राजनीतिक और धार्मिक सोच से जोड़कर हमला कर रही है। अब मामला राजनीतिक मंच से निकलकर अदालत तक पहुंच चुका है। इसलिए आने वाले दिनों में अजय राय मानहानि केस की सुनवाई और उसमें सामने आने वाले दस्तावेज इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

TAGGED:Yogi Adityanath
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