हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी थाने में FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई जवाहर नगर निवासी अमित कुमार की शिकायत के आधार पर हुई है। शिकायतकर्ता अमित कुमार ने खुद को वाल्मीकि समाज से जुड़ा बताते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 11 अगस्त को रामलीला मैदान में हुए कार्यक्रम को जातिगत रंग दिया। उनका दावा है कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से अनुसूचित जाति समुदाय और उनकी भावनाएं आहत हुईं।
राहुल गांधी के खिलाफ किन धाराओं में केस?
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 के साथ-साथ SC/ST एक्ट, 1989 की धारा 3(1) के तहत FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ता की ओर से इस मामले में कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, FIR में लगाए गए आरोपों का अंतिम कानूनी निर्धारण जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा। फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाया?
जवाहर नगर निवासी अमित कुमार ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ से जुड़े हुए हैं। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि वह 11 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए सफाई और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मौके पर मौजूद थे। उनका कहना है कि कार्यक्रम में अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हुए थे और इसे किसी एक जाति से जोड़ना उचित नहीं है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की टिप्पणी से पूरे मामले को जातिगत रूप दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि इसके बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आईं।
पुलिस को वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट भी सौंपे
अमित कुमार ने पुलिस से सिर्फ FIR दर्ज करने की मांग नहीं की, बल्कि मामले से जुड़े डिजिटल और दूसरे साक्ष्यों की भी जांच का अनुरोध किया है।
शिकायत के साथ राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पोस्ट और 8 व 11 अगस्त के कार्यक्रमों से जुड़े फोटो-वीडियो पुलिस को उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसके अलावा कार्यक्रम में शामिल लोगों के बयान दर्ज करने का भी अनुरोध किया गया। शिकायत की प्रतियां नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), अन्य संबंधित अधिकारियों और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भी भेजी गई हैं।
आखिर क्या है पूरा ‘शुद्धिकरण’ विवाद?
विवाद की शुरुआत हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त को हुई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तीन दिन बाद यानी 11 अगस्त को कुछ लोगों ने मैदान में कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ किया था। इसके बाद इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। कांग्रेस ने इस घटना को दलितों के प्रति भेदभाव और बीजेपी की कथित दलित विरोधी सोच से जोड़कर सवाल उठाए। वहीं, बीजेपी की ओर से इसका अलग पक्ष रखा गया। बीजेपी ने दावा किया कि जनसभा के दौरान मैदान में गंदगी हुई थी और धार्मिक स्थल पर आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे, जिसके बाद शुद्धिकरण किया गया।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी और RSS पर निशाना साधा था। उन्होंने कथित शुद्धिकरण को छुआछूत से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में FIR दर्ज कराने के लिए निर्देश देने की मांग भी की थी। अब इसी विवाद में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।
मामला अब किस दिशा में जाएगा?
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले से जुड़े बयानों, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य उपलब्ध सामग्री की जांच कर सकती है। शिकायतकर्ता ने जिन कार्यक्रमों और लोगों का उल्लेख किया है, उनके संबंध में भी जानकारी जुटाई जा सकती है। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल दोनों पक्ष इस विवाद को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं और मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बना हुआ है।
एक तरफ राहुल गांधी, दूसरी तरफ शिकायतकर्ता का पक्ष
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस ने कथित शुद्धिकरण को सामाजिक भेदभाव और दलित सम्मान से जोड़कर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर शिकायतकर्ता का कहना है कि कार्यक्रम को जाति विशेष से जोड़ना गलत है और राहुल गांधी की टिप्पणी से वाल्मीकि समाज की भावनाएं प्रभावित हुईं। ऐसे में अब FIR के बाद पुलिस जांच इस विवाद के कानूनी पहलुओं को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
