बच्चों में विकास में देरी को लेकर माता-पिता अक्सर यह सोचकर चिंता नहीं करते कि बच्चा थोड़ा बड़ा होने के बाद खुद बोलना या दूसरे काम सीखना शुरू कर देगा। यह बात कुछ मामलों में सही हो सकती है, क्योंकि हर बच्चे के विकास की रफ्तार एक जैसी नहीं होती। लेकिन अगर बोलने में देरी के साथ सामाजिक व्यवहार, समझने या खेलने के तरीके में भी अंतर दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बच्चे के विकास को केवल बोलने की क्षमता से नहीं देखा जाता। वह किस तरह खेलता है, दूसरों से कैसे जुड़ता है, आवाज पर कैसी प्रतिक्रिया देता है, चीजों को कैसे समझता है और उम्र के हिसाब से कौन-कौन से कौशल सीख रहा है—इन सभी बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
हर बच्चा एक ही उम्र में सभी चीजें नहीं सीखता
बच्चों में विकास के milestones यानी विकास के पड़ाव उम्र के साथ अलग-अलग दिखाई देते हैं। इनमें मुस्कुराना, बैठना, चलना, इशारा करना, बोलना, खेलना और दूसरों के साथ बातचीत करना शामिल है। कुछ बच्चे कोई कौशल थोड़ा पहले सीखते हैं तो कुछ बाद में। इसलिए किसी दूसरे बच्चे से तुलना करके तुरंत यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि बच्चे के विकास में समस्या है। चिंता तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब बच्चा लगातार अपनी उम्र के अपेक्षित milestones हासिल नहीं कर रहा हो या पहले सीखी हुई कोई क्षमता खोने लगे।
देर से बोलना कब ध्यान देने वाली बात है?
बच्चे का थोड़ा देर से बोलना अकेले किसी बीमारी का प्रमाण नहीं है। लेकिन अगर समय बीतने के साथ उसकी communication skills में प्रगति नहीं हो रही है, तो माता-पिता को डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
खास तौर पर अगर बोलने में देरी के साथ बच्चा:
- नाम पुकारने पर लगातार प्रतिक्रिया नहीं देता
- दूसरों से बातचीत या जुड़ने में कम रुचि दिखाता है
- आंखों में देखने से लगातार बचता है
- अपनी जरूरत बताने में बहुत परेशानी महसूस करता है
- पहले सीखी हुई बोलने की क्षमता खो देता है
तो बच्चे के विकास का assessment कराना बेहतर रहता है।
Eye Contact कम होना भी ध्यान देने वाला संकेत
बच्चों में Eye Contact यानी आंखों से संपर्क की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए केवल कम Eye Contact को देखकर किसी developmental condition का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन अगर बच्चों में विकास में देरी के साथ Eye Contact लगातार कम हो, बच्चा नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न दे या दूसरे लोगों के साथ interaction में रुचि कम दिखाए, तो इस बारे में pediatrician से चर्चा करना उचित है।
हाथ फड़फड़ाना या बार-बार एक ही गतिविधि करना
कुछ बच्चों में बार-बार एक जैसी गतिविधियां दिखाई दे सकती हैं। उदाहरण के लिए हाथ फड़फड़ाना, गोल-गोल घूमना या खिलौने के किसी एक हिस्से को बार-बार देखते रहना। ऐसा व्यवहार अकेले किसी समस्या की पुष्टि नहीं करता। लेकिन अगर इसके साथ communication या social interaction से जुड़ी दूसरी चिंताएं भी मौजूद हों, तो विशेषज्ञ से मूल्यांकन कराने की जरूरत हो सकती है।
तेज आवाज या रोशनी से बहुत ज्यादा परेशानी
कुछ बच्चों में तेज आवाज, रोशनी या किसी खास स्पर्श को लेकर असामान्य रूप से ज्यादा संवेदनशीलता दिखाई दे सकती है। अगर बच्चा ऐसी परिस्थितियों में बहुत ज्यादा परेशान होता है और इसके साथ बोलने, खेलने या सामाजिक व्यवहार में भी लगातार अंतर नजर आता है, तो माता-पिता को डॉक्टर से इस बारे में चर्चा करनी चाहिए।
विकास में देरी की वजह क्या हो सकती है?
Developmental delay के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं होता। अलग-अलग बच्चों में कारण अलग हो सकते हैं। संभावित कारणों में कुछ genetic factors, समय से पहले जन्म, कम birth weight, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, सुनने या देखने से जुड़ी समस्या, कुछ स्वास्थ्य स्थितियां और अन्य developmental factors शामिल हो सकते हैं। कई मामलों में किसी एक स्पष्ट कारण की पहचान भी नहीं हो पाती। इसी वजह से केवल इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर बच्चे की समस्या का कारण तय करना सही नहीं है।
बच्चे की सुनने की क्षमता भी जांचना जरूरी
अगर बच्चा देर से बोल रहा है तो केवल speech development पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कई बार सुनने में परेशानी के कारण भी बच्चा आवाजों और शब्दों को ठीक से समझ नहीं पाता, जिससे भाषा सीखने में देरी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर बच्चे की स्थिति के आधार पर hearing test या speech-language assessment की सलाह दे सकते हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर माता-पिता को लगता है कि बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से बोलने, समझने, खेलने, चलने या दूसरों से जुड़ने में लगातार पीछे रह रहा है, तो ‘थोड़ा और इंतजार करते हैं’ वाली सोच पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। CDC भी सलाह देता है कि अगर बच्चा उम्र के अनुसार milestones हासिल नहीं कर रहा है या माता-पिता को उसके खेलने, सीखने, बोलने, व्यवहार या movement को लेकर चिंता है, तो डॉक्टर से बात करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर developmental screening या specialist evaluation कराया जा सकता है।
पहले से सीखी हुई क्षमता खोना ज्यादा गंभीर संकेत
अगर बच्चा पहले कोई शब्द बोलता था और अब बोलना बंद कर दिया है, पहले किसी व्यक्ति या चीज की ओर इशारा करता था लेकिन अब नहीं करता, या पहले हासिल किया हुआ कोई अन्य developmental skill खत्म हो गया है, तो इसे विशेष रूप से गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जल्द संपर्क करना बेहतर है। CDC भी पहले से हासिल skills के बारे में चिंता होने पर जल्दी कार्रवाई करने की सलाह देता है।
डॉक्टर बच्चे की जांच कैसे कर सकते हैं?
Developmental delay की पहचान केवल एक blood test से नहीं होती। डॉक्टर बच्चे के व्यवहार, communication, movement, learning और social interaction को देखकर assessment कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार developmental screening, hearing test, speech-language evaluation या किसी specialist से assessment की सलाह दी जा सकती है।
माता-पिता घर पर क्या कर सकते हैं?
बच्चे के विकास पर नजर रखने के लिए माता-पिता रोजमर्रा की गतिविधियों में कुछ बातों पर ध्यान दे सकते हैं। बच्चे से बातचीत करें, उसके साथ खेलें, उसकी आवाज या इशारों का जवाब दें और उसकी उम्र के अनुसार milestones को track करें। अगर कोई चिंता नजर आती है तो उसे नोट करके डॉक्टर के साथ साझा करें। CDC के अनुसार developmental monitoring और screening से संभावित देरी की पहचान जल्दी करने में मदद मिल सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने के बजाय उसकी अपनी developmental progress पर नजर रखें।
बच्चों में विकास में देरी को लेकर सबसे जरूरी बातें
| संकेत | क्या ध्यान रखें |
|---|---|
| देर से बोलना | Communication की progress देखें |
| Eye Contact कम होना | दूसरे social संकेतों के साथ देखें |
| नाम पुकारने पर जवाब न देना | Hearing और developmental assessment की जरूरत हो सकती है |
| बार-बार एक जैसी गतिविधि | दूसरे behavioral संकेतों के साथ मूल्यांकन जरूरी |
| आवाज/रोशनी से ज्यादा संवेदनशीलता | लगातार हो तो डॉक्टर से चर्चा करें |
| पहले सीखी skill खोना | जल्द डॉक्टर से संपर्क करें |
| कई milestones में देरी | Developmental screening पर विचार करें |
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें बताए गए संकेत किसी बीमारी या developmental condition का निदान नहीं करते। अगर बच्चे के विकास को लेकर चिंता है, तो pediatrician या qualified child-development specialist से व्यक्तिगत सलाह लें।
