नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में इन दिनों स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।
डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर मरीज सामान्य इलाज से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और निमोनिया जैसी जटिलता पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हर व्यक्ति में स्वाइन फ्लू का असर एक जैसा नहीं होता। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
Swine Flu के मामले बढ़ने की क्या वजह है?
डॉक्टरों के अनुसार इन्फ्लूएंजा वायरस समय के साथ छोटे-छोटे आनुवंशिक बदलाव करता रहता है। इन्हें एंटीजेनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है। इसी वजह से अलग-अलग मौसम में फ्लू का असर कुछ अलग दिखाई दे सकता है।
कभी-कभी वायरस में बड़ा बदलाव भी हो सकता है, जिसे एंटीजेनिक शिफ्ट कहा जाता है। हालांकि, मौजूदा समय में भारत में H1N1 के किसी नए स्ट्रेन की पुष्टि नहीं हुई है। ICMR वैज्ञानिकों ने भी कहा है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
किन लोगों में निमोनिया का खतरा ज्यादा?
आमतौर पर स्वाइन फ्लू में बुखार, खांसी, गले में दर्द, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ज्यादातर लोग कुछ समय में ठीक हो जाते हैं।
लेकिन कुछ मरीजों में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच सकता है और वायरल निमोनिया की स्थिति पैदा कर सकता है। खासकर पहले से फेफड़ों की बीमारी या दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
सांस लेने में परेशानी, लगातार या बढ़ता हुआ बुखार, ऑक्सीजन लेवल गिरना, सीने में दर्द या तेजी से बिगड़ती तबीयत जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है।
बुजुर्ग और छोटे बच्चों को ज्यादा सावधानी
ICMR के वैज्ञानिकों के मुताबिक छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में फ्लू की जटिलताओं का खतरा ज्यादा हो सकता है। यदि लक्षण लगातार बने रहें या गंभीर होते जाएं तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
इसके अलावा कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों और संक्रमण के ज्यादा संपर्क में आने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए।
फ्लू वैक्सीन से मिल सकती है सुरक्षा
विशेषज्ञों के मुताबिक इन्फ्लूएंजा वैक्सीन गंभीर बीमारी और उससे जुड़ी जटिलताओं के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है, खासकर हाई-रिस्क लोगों में। फ्लू वायरस में बदलाव होते रहने के कारण वैक्सीन को समय-समय पर अपडेट किया जाता है।
हालांकि वैक्सीन संक्रमण को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देती, लेकिन गंभीर बीमारी का खतरा कम करने में मदद कर सकती है।
बचाव के लिए क्या करें?
स्वाइन फ्लू और दूसरे श्वसन संक्रमणों से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक हाथों की साफ-सफाई रखें, बीमार होने पर घर पर रहें, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें और जरूरत के मुताबिक मास्क का इस्तेमाल करें। बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों में बेहतर वेंटिलेशन भी संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।
ध्यान रखें: हर बुखार या खांसी को स्वाइन फ्लू मानना सही नहीं है। लेकिन लक्षण गंभीर हों या लगातार बिगड़ रहे हों तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
