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Nobel Prize 2026: आखिर कैसे चुना जाता है विजेता? नामांकन से अंतिम फैसले तक समझिए पूरी प्रक्रिया

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Last updated: October 7, 2026 2:05 am
By : Desh Darbar
Published on : 2 weeks पहले
Nobel Prize 2026 Selection Process
Nobel Prize 2026 Selection Process
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नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में गिना जाता है। विज्ञान, साहित्य और शांति जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले लोगों और संस्थाओं को यह सम्मान दिया जाता है।

हर साल अक्टूबर में जब नोबेल पुरस्कारों के विजेताओं के नाम सामने आते हैं, तो लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर इन विजेताओं का चयन कैसे होता है?

दरअसल, नोबेल पुरस्कार का चयन किसी एक व्यक्ति या एक संस्था का फैसला नहीं होता। इसके पीछे नामांकन, विशेषज्ञों की जांच, उम्मीदवारों की छंटनी, विस्तृत मूल्यांकन और अंतिम मतदान की लंबी प्रक्रिया होती है। पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक गोपनीय रखा जाता है और नामांकन से जुड़ी जानकारी 50 वर्षों तक सार्वजनिक नहीं की जाती।

Nobel Prize के लिए कौन-कौन से क्षेत्र हैं?

अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के आधार पर मूल रूप से पांच क्षेत्रों में पुरस्कार दिए जाने की व्यवस्था थी। बाद में आर्थिक विज्ञान को भी इसमें शामिल किया गया।

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क्षेत्रअंतिम चयन करने वाली संस्था
भौतिकीरॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज
रसायन विज्ञानरॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज
शरीर क्रिया विज्ञान/चिकित्सानोबेल असेंबली, करोलिंस्का इंस्टीट्यूट
साहित्यस्वीडिश एकेडमी
शांतिनॉर्वेजियन नोबेल कमेटी
आर्थिक विज्ञानरॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज

इन अलग-अलग श्रेणियों में चयन की बारीकियां अलग हो सकती हैं, लेकिन व्यापक रूप से प्रक्रिया नामांकन से शुरू होकर विशेषज्ञ मूल्यांकन और अंतिम निर्णय तक पहुंचती है।

सबसे पहले शुरू होती है नामांकन प्रक्रिया

नोबेल पुरस्कार के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को अपनी ओर से आवेदन करने का अधिकार नहीं होता। Self-nomination यानी खुद को नामांकित करना मान्य नहीं है।

हर साल संबंधित नोबेल समितियां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों, अकादमिक संस्थानों के सदस्यों, पूर्व नोबेल विजेताओं और अन्य योग्य विशेषज्ञों से उम्मीदवारों के नाम आमंत्रित करती हैं।

नामांकन प्रक्रिया आमतौर पर सितंबर से शुरू होती है और अगले वर्ष के पुरस्कार के लिए नामांकन जमा करने की समयसीमा 31 जनवरी के आसपास होती है। हालांकि अलग-अलग श्रेणियों में योग्य नामांकनकर्ताओं के नियम अलग हो सकते हैं।

नामांकन के बाद क्या होता है?

नाम आ जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उम्मीदवार नोबेल पुरस्कार का दावेदार या संभावित विजेता घोषित हो गया। यह केवल चयन प्रक्रिया का शुरुआती चरण है।

नामांकन मिलने के बाद संबंधित समिति सबसे पहले यह देखती है कि:

  • नामांकन योग्य व्यक्ति ने किया है या नहीं।
  • उम्मीदवार का काम संबंधित पुरस्कार की कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं।
  • उसके योगदान का महत्व कितना व्यापक है।
  • उसके काम का प्रभाव तत्काल है या लंबे समय तक मानवता को लाभ पहुंचाने वाला है।

इसके बाद बड़ी संख्या में प्राप्त नामों की जांच और छंटनी शुरू होती है।

विशेषज्ञों की राय क्यों ली जाती है?

नोबेल पुरस्कार के चयन में सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है विशेषज्ञ मूल्यांकन।

चयन समितियां उम्मीदवारों के काम को समझने और उसकी महत्ता का आकलन करने के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की मदद ले सकती हैं। खासकर विज्ञान के क्षेत्रों में किसी खोज या शोध की मौलिकता, प्रभाव और वैज्ञानिक महत्व को गहराई से परखा जाता है।

भौतिकी के मामले में उदाहरण के तौर पर प्रारंभिक उम्मीदवारों के काम का मूल्यांकन विशेष रूप से नियुक्त विशेषज्ञों से कराया जाता है। इसके बाद समिति विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके आगे की प्रक्रिया बढ़ाती है।

महीनों तक चलती है पूरी पड़ताल

नोबेल पुरस्कार का चयन जल्दबाजी में नहीं किया जाता। उम्मीदवारों के काम और योगदान की कई महीनों तक समीक्षा की जा सकती है।

इस दौरान समिति यह समझने की कोशिश करती है कि उम्मीदवार का योगदान वास्तव में कितना महत्वपूर्ण है और क्या वह उस स्तर का है जिसे नोबेल पुरस्कार के माध्यम से वैश्विक सम्मान दिया जाना चाहिए।

यही वजह है कि नामांकन से लेकर अंतिम निर्णय तक की प्रक्रिया में काफी समय लगता है।

सितंबर में सामने आती है अंतिम सिफारिश

कई चरणों की समीक्षा और विशेषज्ञों की राय के बाद संबंधित नोबेल समिति अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिश तैयार करती है।

इसके बाद यह सिफारिश उस संस्था के सामने रखी जाती है, जिसके पास संबंधित श्रेणी में अंतिम पुरस्कार देने का अधिकार है।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—नोबेल समिति और अंतिम निर्णय लेने वाली संस्था हमेशा एक ही नहीं होती। अधिकांश श्रेणियों में समिति उम्मीदवारों की जांच और सिफारिश करती है, जबकि अंतिम निर्णय संबंधित पुरस्कार देने वाली संस्था करती है।

अंतिम विजेता का फैसला कैसे होता है?

अंतिम चरण में संबंधित पुरस्कार देने वाली संस्था उम्मीदवारों पर विचार करती है और मतदान के जरिए विजेता का चयन किया जाता है।

एक बार फैसला हो जाने के बाद यह निर्णय अंतिम माना जाता है। इसके बाद अक्टूबर में दुनिया के सामने उस वर्ष के नोबेल पुरस्कार विजेता के नामों की घोषणा शुरू होती है।

Nobel Peace Prize की प्रक्रिया थोड़ी अलग

नोबेल शांति पुरस्कार बाकी श्रेणियों से कुछ अलग है।

शांति पुरस्कार के लिए उम्मीदवारों के नामों का मूल्यांकन और अंतिम विजेता का चयन Norwegian Nobel Committee करती है। यह समिति पांच सदस्यों से बनी होती है, जिन्हें नॉर्वे की संसद नियुक्त करती है।

2026 में शांति पुरस्कार के लिए 287 उम्मीदवार नामांकित किए गए हैं, जिनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाते।

2026 में कब-कब हो रही है नोबेल पुरस्कारों की घोषणा?

2026 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा अक्टूबर में अलग-अलग तारीखों पर की जा रही है।

तारीखपुरस्कार
5 अक्टूबर 2026शरीर क्रिया विज्ञान/चिकित्सा
6 अक्टूबर 2026भौतिकी
7 अक्टूबर 2026रसायन विज्ञान
8 अक्टूबर 2026साहित्य
9 अक्टूबर 2026शांति
12 अक्टूबर 2026आर्थिक विज्ञान

2026 में अब तक चिकित्सा और भौतिकी श्रेणी के विजेताओं की घोषणा हो चुकी है।

विजेता को क्या मिलता है?

नोबेल पुरस्कार विजेता को केवल सम्मान का दर्जा ही नहीं मिलता, बल्कि पुरस्कार के साथ नोबेल पदक, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि भी दी जाती है।

पुरस्कार समारोह हर साल 10 दिसंबर को आयोजित किया जाता है। यह तारीख अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि है। शांति पुरस्कार का समारोह ओस्लो में और अन्य नोबेल पुरस्कारों का समारोह स्टॉकहोम में होता है।

50 साल तक क्यों छिपी रहती है जानकारी?

नोबेल पुरस्कार की चयन प्रक्रिया की सबसे दिलचस्प बात इसकी गोपनीयता है। किसे नामांकित किया गया, किसने नामांकन किया और चयन के दौरान क्या विचार-विमर्श हुआ—इनसे जुड़ी जानकारी तत्काल सार्वजनिक नहीं की जाती।

नोबेल के नियमों के अनुसार नामांकन और उससे संबंधित दस्तावेजों पर 50 वर्षों तक गोपनीयता लागू रहती है। इसलिए किसी व्यक्ति का नाम मीडिया या सार्वजनिक चर्चा में आ जाना यह साबित नहीं करता कि वह आधिकारिक तौर पर नोबेल पुरस्कार का उम्मीदवार है।

नोबेल पुरस्कार की चमक के पीछे एक बेहद सुनियोजित, विशेषज्ञ-आधारित और गोपनीय चयन प्रक्रिया काम करती है। नामांकन से लेकर विशेषज्ञों की जांच, उम्मीदवारों की छंटनी, विस्तृत रिपोर्ट और अंत में मतदान तक कई स्तरों पर किसी व्यक्ति या संस्था के योगदान को परखा जाता है।

यही लंबी प्रक्रिया नोबेल पुरस्कार को महज एक सम्मान नहीं, बल्कि मानवता, ज्ञान और असाधारण योगदान की वैश्विक मान्यता बनाती है।

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