पटना। बिहार में आरक्षण को लेकर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बयान के बाद सत्ताधारी गठबंधन के घटक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपना रुख सामने रखा है। BJP और JDU की ओर से आरक्षण व्यवस्था को लेकर समर्थन की बात कही गई है।
चिराग ने संविधान और आरक्षण पर जताया भरोसा
चिराग पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि संविधान और आरक्षण को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
चिराग का बयान ऐसे समय आया है, जब आरक्षण की व्यवस्था और इसके भविष्य को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस चल रही है। ऐसे में उनके बयान को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BJP बोली- आरक्षण व्यवस्था के पक्ष में है पार्टी
चिराग पासवान के बयान के बाद बिहार BJP ने भी अपना पक्ष स्पष्ट किया। पार्टी की ओर से कहा गया कि BJP आरक्षण की व्यवस्था के समर्थन में रही है और आगे भी रहेगी।
BJP ने आरक्षण को लेकर लोगों के बीच किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं रहने देने की बात कही। पार्टी के मुताबिक, आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को लेकर बेवजह की आशंकाओं पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।
JDU ने भी दोहराया आरक्षण का समर्थन
वहीं JDU ने भी आरक्षण के समर्थन में अपना रुख दोहराया। पार्टी की ओर से कहा गया कि सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
JDU ने दलित, पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन वर्गों को उनका उचित प्रतिनिधित्व और अवसर मिलना जरूरी है।
अतिपिछड़ा वर्ग को लेकर JDU की अलग मांग
JDU की ओर से अतिपिछड़ा वर्ग के लिए अलग वर्गीकरण की मांग का भी जिक्र किया गया। पार्टी का कहना है कि अतिपिछड़े वर्ग को उनकी आबादी और जरूरत के हिसाब से प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद आरक्षण को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
NDA के भीतर दिखी आरक्षण पर सहमति
चिराग पासवान, BJP और JDU के बयानों को देखें तो फिलहाल NDA के प्रमुख घटक दल आरक्षण के समर्थन में नजर आ रहे हैं। हालांकि, आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह राजनीतिक रूप देता है, यह देखने वाली बात होगी।
बिहार में चुनावी राजनीति के बीच आरक्षण का मुद्दा काफी संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में नेताओं के बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
