फगवाड़ा (पंजाब): पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
छात्राओं के हॉस्टल से जुड़ी एक कथित घटना की खबर फैलने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, जो देखते ही देखते तोड़फोड़, पुलिस के साथ झड़प और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर जाम तक पहुंच गया।
घटना के बाद विश्वविद्यालय ने 28 सितंबर से नियमित कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित कर दी हैं। मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में कथित अपराध से जुड़े दावों को अफवाह बताते हुए उनका खंडन किया है।
हॉस्टल से जुड़ी खबर फैलने के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन
रिपोर्टों के मुताबिक, 26 और 27 सितंबर की दरमियानी रात LPU के गर्ल्स हॉस्टल नंबर-3 से जुड़ी एक कथित घटना को लेकर छात्रों के बीच चर्चा शुरू हुई। सोशल मीडिया और छात्र समूहों में एक छात्रा के साथ कथित यौन अपराध की खबर फैलने लगी। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में ऐसी घटना होने से इनकार किया है। मामले की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए पुलिस जांच कर रही है।
शुरुआत में छात्र हॉस्टल के पास एकत्र हुए। बाद में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ गया और बड़ी संख्या में छात्र परिसर में जुट गए। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
NH-44 पर लगा जाम, कई घंटे प्रभावित रहा यातायात
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने फगवाड़ा में दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को अवरुद्ध कर दिया। इससे इस प्रमुख मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हुए। छात्रों की मांगों में मामले में FIR, जांच के लिए विशेष टीम गठित करने और विश्वविद्यालय प्रबंधन से बातचीत जैसी मांगें शामिल थीं।
कई घंटों तक चले गतिरोध के बाद हाईवे पर यातायात बहाल कर दिया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में जाम की अवधि करीब 15 से 18 घंटे बताई गई है।
पुलिस के साथ झड़प, वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी
रविवार शाम प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकीं। इसके बाद परिसर के आसपास झड़पें हुईं और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया।
रिपोर्टों में पुलिस वाहनों को आग के हवाले किए जाने, अन्य सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई है। परिसर में खिड़कियों, गमलों और अन्य संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने कहा कि घटनास्थल के CCTV फुटेज और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की जांच की जाएगी, ताकि हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल लोगों की पहचान की जा सके।
FIR दर्ज, जांच के लिए SIT गठित
पुलिस ने छात्रों की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 के तहत मामला दर्ज किया है। जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाया गया है, जो मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेगा।
जांच में CCTV फुटेज, डिजिटल सामग्री और अन्य साक्ष्यों की मदद ली जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट खबरों और सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों के आधार पर निष्कर्ष न निकालें।
विश्वविद्यालय ने क्या कहा?
LPU प्रशासन ने कथित घटना से जुड़े दावों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ बाहरी तत्वों ने माहौल का फायदा उठाकर परिसर में अशांति फैलाने की कोशिश की। विश्वविद्यालय ने छात्रों की सुरक्षा और उनके भरोसे को प्राथमिकता बताते हुए संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
विश्वविद्यालय की ओर से कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित करने और मिड-टर्म परीक्षाएं टालने का फैसला भी किया गया है। इस बीच कई छात्र परिसर से अपने घरों के लिए रवाना हुए, जबकि कुछ अभिभावक भी अपने बच्चों को लेने पहुंचे।
परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई, स्थिति नियंत्रण में
हिंसा के बाद विश्वविद्यालय परिसर और हॉस्टल के आसपास पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त बल बुलाया गया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। NH-44 पर यातायात भी बहाल कर दिया गया।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसरों में सुरक्षा, शिकायतों पर समय पर कार्रवाई और अफवाहों के बीच स्पष्ट संवाद की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
