नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026। दुनिया में एक ओर बड़ी आबादी को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ खेतों से बाजार तक पहुंचने और लोगों की थाली तक आने के बीच बर्बाद हो जाते हैं।
इसी गंभीर मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय खाद्य हानि एवं बर्बादी जागरूकता दिवस मनाया जाता है।
इस दिवस का उद्देश्य केवल लोगों को भोजन की बर्बादी से बचने की सलाह देना नहीं, बल्कि खाद्य उत्पादन, भंडारण, परिवहन, बिक्री और उपभोग से जुड़ी पूरी व्यवस्था में नुकसान कम करने की जरूरत को सामने लाना है।
वर्ष 2026 में इस दिवस का सातवां आयोजन हो रहा है। इस साल का प्रमुख संदेश खाद्य हानि और बर्बादी को कम करने की परिवर्तनकारी क्षमता पर केंद्रित है। इसमें खाद्य सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जलवायु और आर्थिक विकास के बीच संबंध को रेखांकित किया गया है।
29 सितंबर को क्यों मनाया जाता है यह दिवस?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2019 में 29 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय खाद्य हानि एवं बर्बादी जागरूकता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। इस पहल का मकसद खाद्य पदार्थों के नुकसान और बर्बादी के सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना है।
इस दिवस का आयोजन संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की साझेदारी में किया जाता है। दोनों संस्थाएं सरकारों, कारोबारियों, किसानों और आम लोगों से खाद्य हानि एवं बर्बादी कम करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान करती हैं।
2026 की थीम में क्या है खास?
वर्ष 2026 का संदेश खाद्य हानि और बर्बादी कम करने की परिवर्तनकारी क्षमता पर केंद्रित है। इसका जोर इस बात पर है कि भोजन की बर्बादी रोकने का फायदा केवल खाने की बचत तक सीमित नहीं रहता।
इससे खाद्य सुरक्षा और पोषण को बेहतर बनाने, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव घटाने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और आर्थिक उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
इस साल की वैश्विक चर्चा में खाद्य हानि और बर्बादी का जंगलों तथा टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों से संबंध भी प्रमुखता से शामिल है। भोजन की मांग पूरी करने के लिए जमीन, पानी और ऊर्जा का इस्तेमाल होता है।
जब भोजन उपयोग में आने से पहले ही नष्ट हो जाता है, तो उसके उत्पादन में लगे संसाधनों का भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
खाद्य हानि और खाद्य बर्बादी में क्या अंतर है?
अक्सर खाद्य हानि और खाद्य बर्बादी को एक ही अर्थ में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन दोनों के बीच अंतर है।
खाद्य हानि (Food Loss): यह आम तौर पर खाद्य उत्पादन, कटाई, भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण के शुरुआती चरणों में होने वाले नुकसान को दर्शाती है। उचित भंडारण की कमी, खराब परिवहन व्यवस्था या फसल के खराब होने जैसे कारणों से भोजन नष्ट हो सकता है।
खाद्य बर्बादी (Food Waste): यह प्रायः खुदरा बिक्री, भोजन परोसने और उपभोग के स्तर पर होने वाली बर्बादी से जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए, जरूरत से ज्यादा भोजन खरीदना, प्लेट में खाना छोड़ देना या इस्तेमाल योग्य खाद्य पदार्थों को बिना जरूरत फेंक देना।
दोनों ही स्थितियों में भोजन और उसे तैयार करने में लगे संसाधनों का नुकसान होता है। इसलिए समाधान के लिए खेत से लेकर रसोई तक हर स्तर पर ध्यान देना जरूरी है।
भोजन की बर्बादी का पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है?
भोजन तैयार करने में जमीन, पानी, ऊर्जा, श्रम और परिवहन जैसे संसाधनों की जरूरत होती है। यदि खाद्य पदार्थ इस्तेमाल होने से पहले फेंक दिए जाते हैं, तो इन संसाधनों का उपयोग भी व्यर्थ हो जाता है।
खाद्य पदार्थों का कचरा जब लैंडफिल में पहुंचता है, तो उसके सड़ने से मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें निकल सकती हैं। इस तरह खाद्य बर्बादी जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों को भी बढ़ाती है।
इसके अलावा भोजन की मांग पूरी करने के लिए कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव पड़ता है। खाद्य हानि और बर्बादी कम करना संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
घरों में भोजन की बर्बादी कैसे रोकें?
खाद्य बर्बादी कम करने के लिए बड़े स्तर पर नीतियों और व्यवस्थाओं की जरूरत है, लेकिन आम लोग भी रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करके योगदान दे सकते हैं।
- जरूरत के हिसाब से खरीदारी करें: बाजार जाने से पहले सूची बनाएं और उतना ही सामान खरीदें, जितनी जरूरत हो।
- भोजन की सही मात्रा बनाएं: परिवार के सदस्यों की संख्या और उनकी जरूरत के अनुसार खाना तैयार करें।
- खाद्य पदार्थ सही तरीके से रखें: अनाज, फल, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों को उनकी प्रकृति के अनुसार सुरक्षित रखें।
- पहले खरीदे सामान का पहले इस्तेमाल करें: फ्रिज और रसोई में रखे खाद्य पदार्थों की नियमित जांच करें, ताकि वे खराब होने से पहले उपयोग में आ सकें।
- बचे हुए भोजन का सुरक्षित इस्तेमाल करें: यदि भोजन सही तरीके से रखा गया है और खाने योग्य है, तो उसे उचित समय के भीतर इस्तेमाल करें।
- खाने की प्लेट में उतना ही लें, जितना खा सकें: जरूरत पड़ने पर दोबारा लें, लेकिन भोजन को बेवजह न छोड़ें।
इन छोटे कदमों से घरों में होने वाली अनावश्यक खाद्य बर्बादी को कम किया जा सकता है।
किसानों, कारोबारियों और संस्थानों की भी बड़ी भूमिका
खाद्य हानि रोकने के लिए केवल उपभोक्ताओं की आदतें बदलना पर्याप्त नहीं है। खेतों में फसल की कटाई, उसके भंडारण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था को भी बेहतर बनाना जरूरी है।
किसानों के लिए उपयुक्त भंडारण सुविधाएं, बेहतर परिवहन, समय पर बाजार तक पहुंच और खाद्य प्रसंस्करण की व्यवस्था नुकसान घटाने में मदद कर सकती है। वहीं दुकानों, होटल-रेस्तरां और अन्य खाद्य कारोबारों में मांग के अनुसार खरीद तथा भोजन तैयार करने की योजना बनाना उपयोगी हो सकता है।
खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी उन स्थितियों में मददगार हो सकती है, जहां भोजन उपयोग योग्य है, लेकिन सामान्य बिक्री या वितरण में इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य से भी जुड़ा है अभियान
खाद्य हानि और बर्बादी कम करने का लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) से जुड़ा है। इसके लक्ष्य 12.3 में 2030 तक खुदरा और उपभोक्ता स्तर पर प्रति व्यक्ति वैश्विक खाद्य बर्बादी को आधा करने तथा उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में खाद्य नुकसान कम करने की बात कही गई है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकारों, खाद्य उद्योग, किसानों, खुदरा कारोबारियों और उपभोक्ताओं के बीच सहयोग जरूरी है। बेहतर तकनीक, मजबूत आपूर्ति व्यवस्था और जिम्मेदार उपभोग की आदतें इस दिशा में मदद कर सकती हैं।
जागरूकता से आगे बढ़कर कार्रवाई की जरूरत
अंतरराष्ट्रीय खाद्य हानि एवं बर्बादी जागरूकता दिवस यह याद दिलाता है कि भोजन का मूल्य केवल उसकी कीमत तक सीमित नहीं है। हर खाद्य पदार्थ के पीछे किसान की मेहनत, पानी, जमीन, ऊर्जा और कई लोगों का श्रम जुड़ा होता है।
भोजन की बर्बादी कम करना भूख और कुपोषण से निपटने, प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और टिकाऊ खाद्य व्यवस्था बनाने के प्रयासों का अहम हिस्सा है। इसके लिए घरों में जिम्मेदार आदतों से लेकर कृषि और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था में सुधार तक, सभी स्तरों पर निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
29 सितंबर का यह दिवस इसी साझा जिम्मेदारी का संदेश देता है—भोजन का सम्मान करें, जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करें और उसे खेत से थाली तक पहुंचाने में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अपनी भूमिका निभाएं।
